बेलबरन पूजा के साथ पुजारी ने जगत जननी का किया आह्वान

इसके बाद विधि विधान से नवपत्रिका का पूजन कर माता का आह्वान किया गया.

प्रतिनिधि, बासुकिनाथ बेलबरन अनुष्ठान के साथ शारदीय नवरात्र के षष्ठी तिथि रविवार को माता जगत जननी का आह्वान किया गया. इसके बाद विधि विधान से नवपत्रिका का पूजन कर माता का आह्वान किया गया. दुर्गा मंदिर के पुजारी के नेतृत्व में गाजे बाजे के साथ संध्या बेला बेल वृक्ष के नीचे पहुंचे तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश स्थापित किया. कलश स्थापना के बाद नौ पत्रिका की पूजा-अर्चना की गयी. बेल के वृक्ष के पास यात्रा पहुंचने के बाद वैदिक व पारंपरिक रीति-रिवाज से बेल के पत्तों को निमंत्रित किया गया है. जरमुंडी दुर्गा मंदिर के पुजारी श्याम मिश्र ने बताया कि सप्तमी तिथि सोमवार को कलश व बेल के फल का जोड़ा पूजा पंडाल में लाया जायेगा, जिसे पूजा स्थल पर विधि विधान से स्थापित कर माता की स्तुति की जायेगी. इसके बाद वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ माता के प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जायेगी. पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिये जायेंगे. रविवार को मंदिर में माता के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की अराधना की गयी. उन्होंने बताया कि देवी कात्यायनी के ध्यान पूजन से सांसारिक कष्टों व भय से मुक्ति मिलती है. इस दौरान जरमुंडी, बासुकिनाथ, सहारा, तालझारी, हरिपुर सहित इलाके के सभी दुर्गा मंदिर में माता की जयकारों से गुंजायमान होता रहा. शंख, घंटी की ध्वनि से वातावरण प्रतिध्वनित हो रहा है. पंडित श्याम मिश्र ने बताया कि नवरात्र में बेल पूजन का अलग ही महत्त्व होती है. बेलबरनी माता का निर्माण बेल, धान की बाली, अनार व केला पत्ता से किया जाता है. इनकी पूजा से सुख व समृद्ध प्राप्त होती है. चहुंओर वैदिक मंत्रोच्चारण दुर्गा सप्तशती पाठ, भक्तों की भीड़ और भक्तिरस रूपी मधुर संगीत से माहौल भक्तिमय बना हुआ है.

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Published by: Anand jaswal

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