उपायुक्त की अध्यक्षता में अभियान और समग्र शिक्षा कार्यक्रमों की हुई समीक्षा संवाददाता, दुमका विद्यालय से बाहर रह रहे दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिले में विशेष नामांकन अभियान शुरू किया गया है. यह अभियान 15 जून से 24 जून 2026 तक चलेगा. इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करना और उन्हें शिक्षा के अधिकार से जोड़ना है. यह अभियान निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत चलाया जा रहा है. जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने दिव्यांग बच्चों का नामांकन निकटतम विद्यालय में अवश्य कराएं. उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के कार्यक्रमों और विशेष नामांकन अभियान की तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में निर्देश दिया गया कि विद्यालय से बाहर और विद्यालयों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की पहचान प्राथमिकता पर की जाए. जिन बच्चों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है उनके लिए विशेष शिविर लगाकर प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया ताकि वे सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ ले सकें. उपायुक्त ने दृष्टिबाधित विद्यालयों में ब्रेल किट और ब्रेल पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और लो विजन बच्चों के विशेष स्वास्थ्य परीक्षण पर जोर दिया गया. विद्यालयों की सुरक्षा के लिए मुख्य सड़कों के किनारे स्थित स्कूलों में लोहे की बाउंड्री वॉल बनाने और जर्जर भवनों की मरम्मत या आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए. प्रशासन ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना प्राथमिकता है.
विद्यालय से बाहर दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष नामांकन अभियान शुरू
दुमका जिले में दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने हेतु 15 से 24 जून 2026 तक विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में दिव्यांग बच्चों की पहचान, प्रमाण पत्र निर्माण और आवश्यक सहायताओं पर जोर दिया गया। ब्रेल किट वितरण, स्वास्थ्य जांच एवं विद्यालय सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल निर्माण समेत कई कदम उठाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता बताया।
