बासुकिनाथ. श्रावणी मेला के 24वें दिन शनिवार को बासुकिनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. सावन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बाबा फौजदारीनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए रात से ही मंदिर के बाहर कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गयी थी. अहले सुबह मंदिर का पट खुलते ही पूरा परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठा.
षोडशोपचार पूजा के बाद शुरू हुआ जलार्पण
षोडशोपचार विधि से सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का पट खोल दिया गया. इसके बाद कांवरियों ने कतारबद्ध होकर बाबा फौजदारीनाथ के अरघा में गंगाजल अर्पित किया. श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कतार क्यू कॉम्प्लेक्स के पहले तल तक पहुंच गयी थी. शिवगंगा पीड़ तक श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही थी.
पूरे मेला क्षेत्र में हर-हर महादेव के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालु हाथों में पवित्र गंगाजल लेकर कतारबद्ध होकर बाबा पर जलार्पण का इंतजार करते रहे. वहीं, प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और सुरक्षा बल के जवान श्रद्धालुओं को सुगमतापूर्वक जलार्पण कराने में जुटे रहे. श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जाती रही.
शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु रूटलाइन में कतारबद्ध होकर मंदिर की ओर बढ़ते रहे. मेला क्षेत्र में सुबह से ही कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रही.
शिवगंगा में मोटर बोट के साथ एनडीआरएफ तैनात
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एनडीआरएफ की टीम सुबह से ही मोटर बोट के साथ शिवगंगा में तैनात रही. टीम के जवान लगातार निगरानी करते हुए किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे. शिवगंगा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती गयी.
स्वास्थ्य विभाग और सूचना सहायता कर्मी रहे मुस्तैद
मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सुबह से ही अपने निर्धारित कर्तव्य स्थल पर तैनात रही. स्वास्थ्यकर्मी पूरी तत्परता के साथ श्रद्धालुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटे रहे.
वहीं, प्रतिनियुक्त सूचना सहायता कर्मियों ने भी श्रद्धालुओं की मदद में सक्रिय भूमिका निभायी. सूचना सहायता कर्मियों ने बिछड़े श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने का काम किया. ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से लगातार बिछड़े श्रद्धालुओं की सूचना प्रसारित की जाती रही.
इसके अलावा जिन श्रद्धालुओं की तबीयत खराब हुई, उन्हें सूचना सहायता कर्मियों की मदद से स्वास्थ्य शिविर तक पहुंचाया गया.
