कबाड़ से बनाया ‘ज्ञान का संसार’, प्रभा सोरेन निरक्षर महिलाओं को दे रहीं शिक्षा : मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

जांबाज प्रभा सोरेन साबित कर रही हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. उन्होंने कबाड़ से अनोखी शिक्षण सामग्री तैयार कर निरक्षर महिलाओं को शिक्षा की राह दिखाई है. उनकी यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा रही है.

दुमका : ज्ञान हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती और सीखने की चाह संसाधनों की मोहताज नहीं होती. इस सोच को चरितार्थ कर रही हैं जामा प्रखंड की चिकनियां पंचायत के लकरजोरिया गांव निवासी 45 वर्षीय प्रभा सोरेन. अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर उनकी पहल क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है. कभी ‘अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक’ अभियान से जुड़ी प्रभा अब नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालय लकरजोरिया जन चेतना केंद्र में स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में निरक्षर महिलाओं को शिक्षा से जोड़ रही हैं.

कबाड़ से तैयार अनोखी शिक्षण सामग्री | Prabhat Khabar Network

कबाड़ से तैयार की आकर्षक शिक्षण सामग्री

प्रभा ने अनुपयोगी और कबाड़ समझे जाने वाले सामानों को शिक्षण सामग्री में बदलकर अनूठी मिसाल पेश की है. ताड़ के सूखे पत्ते, मिट्टी की गोलियां, पुराने कैलेंडर, शादी के निमंत्रण पत्र, चूड़ी व जूते के डिब्बे, टूटे मोबाइल, बंद कैलकुलेटर, पुरानी घड़ियां और बोतलों के ढक्कन से उन्होंने आकर्षक टीएलएम तैयार किए हैं.

कबाड़ से तैयार अनोखी शिक्षण सामग्री | Prabhat Khabar Network

संथाली और हिंदी में सिखाती हैं गिनती व रंग

चार्ट पेपर, रंग और स्थानीय शिल्प के माध्यम से बनाये गये नंबर व अक्षर प्ले कार्ड और मैजिक बॉक्स में संथाली और हिंदी में गिनती, सप्ताह के दिन और रंगों की जानकारी दी गयी है.

तीन महीने में बदली पढ़ाने की शैली

प्रभा बताती हैं कि शुरुआती दिनों में महिलाओं के केंद्र नहीं पहुंचने से निराशा होती थी. इस दौरान जिला कार्यक्रम समन्वयक अशोक सिंह ने उन्हें पढ़ाई को रोचक बनाने की प्रेरणा दी. इसके बाद उन्होंने महज तीन महीने में कबाड़ को शिक्षण सामग्री में बदल दिया.

गुवाहाटी में किया झारखंड का प्रतिनिधित्व

उनके नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और गुवाहाटी में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में उन्होंने झारखंड का प्रतिनिधित्व किया. केंद्र की महिलाओं के लिए प्रभा शिक्षिका के साथ उनकी सुख-दुख की साथी भी हैं.

कहते हैं अधिकारी

जामा के बीइइओ एस्थेर मुर्मू, ने बताया कि प्रखंड के व्हाट्सएप ग्रुप में जब प्रभा सोरेन की शिक्षण पद्धति और उनकी बनायी सामग्री का वीडियो देखा तो लगा कि समर्पण क्या होता है. हमारे पूरे प्रखंड के लिए वे एक गौरव हैं.

वहीं प्रावि लकरजोरिया के प्रधानाध्यापक निर्मल कुमार सिंह के अनुसार शुरुआत में विद्यालय स्तर पर साक्षरता कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा था. प्रभा सोरेन के प्रभाव और उनकी लगन ने पूरे जन चेतना केंद्र का स्वरूप ही बदल दिया. उनका यह प्रयास अद्भुत है.

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By Anand Jayswal

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