रानीश्वर: मयुराक्षी बायां तट मुख्य नहर में एक बार फिर लीकेज की समस्या सामने आने के बाद नुड़ुईबाथान के समीप क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मती कराई गई है. मरम्मती कार्य पूरा होने के बाद अब जरूरत के अनुसार किसानों को सिंचाई के लिए नहर से पानी छोड़े जाने की तैयारी है.
नहर में जिस स्थान पर लीकेज हुआ था, वहां करीब 15 से 20 दिन पहले भी लीकेज की समस्या सामने आई थी. इसके अलावा करीब एक महीने के दौरान मुख्य नहर में चार अलग-अलग जगहों पर लीकेज होने की बात सामने आई, जिसके कारण पानी की आपूर्ति रोककर मरम्मती करानी पड़ी.
बार-बार लीकेज से किसानों की बढ़ी चिंता
मयुराक्षी बायां तट मुख्य नहर में लगातार लीकेज की समस्या किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. बार-बार पानी बंद कर मरम्मती कराने से सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित होती है.
किसानों का कहना है कि नहर के कमजोर हिस्सों की स्थायी रूप से मरम्मती नहीं होने के कारण कुछ समय बाद फिर लीकेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
20 किलोमीटर नहर का हुआ है पक्कीकरण
उल्लेखनीय है कि मसानजोर डैम से चोपाबाथान तक मयुराक्षी बायां तट मुख्य नहर का करीब 20 किलोमीटर लंबा पक्कीकरण कराया गया है. नहर का पक्कीकरण करीब तीन इंच मोटी ढलाई से किया गया था.
किसानों के अनुसार जहां ढलाई के नीचे की मिट्टी कमजोर या दलदली है, वहां नहर में बार-बार लीकेज की समस्या उत्पन्न हो रही है.
खरीफ कटाई के बाद स्थायी मरम्मती की मांग
किसानों ने सुझाव दिया कि खरीफ फसल की कटाई के बाद जब नहर में पानी बंद रहता है, उस दौरान नहर के कमजोर हिस्सों की पहचान कर उन्हें तोड़कर मजबूती के साथ दोबारा मरम्मती कराई जाए.
किसानों का कहना है कि यदि कमजोर स्थानों को स्थायी रूप से मजबूत किया जाता है तो बार-बार लीकेज की समस्या से राहत मिल सकती है और सिंचाई के दौरान किसानों को परेशानी नहीं होगी.
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सिंचाई के लिए जरूरत के अनुसार छोड़ा जाएगा पानी
नुड़ुईबाथान के समीप लीकेज वाले हिस्से की मरम्मती के बाद अब नहर से किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की उम्मीद है. इससे खरीफ फसल के लिए सिंचाई व्यवस्था को सुचारु रखने में मदद मिलेगी.
