आदिवासी संगठनों के आह्वान पर आंदोलन का दुमका में भी असर

पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड के विरोध में आदिवासी छात्रों ने चार घंटे चक्का जाम किया. वाहनों की लंबी कतारें लगी रही.

दुमका नगर. आदिवासी नेता व पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड के विरोध में आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाये गये झारखंड बंद का उपराजधानी दुमका में भी आंशिक असर रहा. यहां दुमका-रामुपरहाट व गोबिंदपुर-साहिबगंज रोड पर चार घंटे तक आवागमन ठप रहा. वाहनों की लंबी कतारें लगी रही. आदिवासी संगठनों के आह्वान पर दुमका के फूलो झानो चौक पर छात्र समन्वय समिति ने पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड के विरोध में शनिवार को 10 बजे सड़क जाम कर दिया. बीच चौराहे पर चारों ओर गाड़ियां खड़ी कर दिये जाने से वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गयीं. हालांकि जाम से स्कूल बसों, एम्बुलेंस और छोटी गाड़ियों को मुक्त रखा गया. छात्र समन्वय समिति के सदस्य निखिल मुर्मू ने कहा कि झारखंड बनने के 25 साल बाद भी सरकार आदिवासियों को कुचलने का काम कर रही है. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों ने लड़कर बलिदान देकर झारखंड बनाया, लेकिन आज भी सरकार उनके लिए मूकदर्शक बनी हुई है. हर छोटे-बड़े मामले में सड़क पर उतरना पड़ रहा है. आदिवासियों की हत्याएं हो रही हैं और पुलिस तमाशबीन बनी देख रही है. वहीं छात्र नेता राजीव बास्की ने पुलिस-प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सोमा मुंडा के हत्यारों को पुलिस नहीं पकड़ पा रही है. इसके अलावा डॉ श्याम देव हेंब्रम ने भी कहा कि सरकार आदिवासियों को नष्ट करने पर तुली है. उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रदर्शन आदिवासी अधिकारों, पुलिस निष्क्रियता और संसाधनों के दोहन के खिलाफ एक बड़ा संकेत है. छात्र समन्वय समिति ने सरकार से तत्काल न्याय की मांग करती है. प्रदर्शन में छात्र समन्वय समिति के कई सदस्य शामिल थे.

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By BINAY KUMAR

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