संवाददाता, दुमका: सितपहाड़ी से सिगरीहरको तक सड़क निर्माण के रोड एलाइनमेंट में आ रही तीन बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की पाइपलाइन शिफ्टिंग के दौरान करीब तीन महीने तक जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है. इससे गोविंदपुर, सितपहाड़ी और हारोरायडीह जलापूर्ति योजनाओं से जुड़े गांवों की करीब 8 से 10 हजार आबादी को अनियमित जलापूर्ति की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, प्रमंडल-2 की ओर से पाइपलाइन शिफ्टिंग के लिए 21.94 लाख रुपये की निविदा जारी की गयी है. काम पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गयी है.
रोड एलाइनमेंट में आ रही मौजूदा पाइपलाइन
सितपहाड़ी से सिगरीहरको तक सड़क निर्माण के लिए तय रोड एलाइनमेंट में मौजूदा जलापूर्ति पाइपलाइन आ रही है. सड़क निर्माण के दौरान पाइपलाइन को नुकसान से बचाने के लिए उसे दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की योजना है.
पाइपलाइन काटने, नयी जगह पर बिछाने और दोबारा कनेक्शन जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान संबंधित जलापूर्ति योजनाओं से पानी की आपूर्ति में अवरोध आने की आशंका है.
8 से 10 हजार लोगों को हो सकती है परेशानी
गोविंदपुर, सितपहाड़ी और हारोरायडीह बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को पेयजल की सुविधा मिलती है.
पाइपलाइन शिफ्टिंग के दौरान यदि आपूर्ति लगातार या रुक-रुक कर प्रभावित होती है, तो करीब 8 से 10 हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इससे ग्रामीणों को पेयजल के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी वैकल्पिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ सकता है.
21.94 लाख की निविदा, 90 दिन में पूरा होगा काम
पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, प्रमंडल-2 ने 21.94 लाख रुपये की निविदा जारी की है. विभाग ने कार्य पूरा करने के लिए 90 दिनों की अवधि तय की है.
शिफ्टिंग का काम शुरू होने के बाद पाइपलाइन काटने और नयी लाइन जोड़ने के अलग-अलग चरणों में जलापूर्ति प्रभावित होने की संभावना है.
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प्रभावित गांवों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत
पाइपलाइन शिफ्टिंग से होने वाली संभावित परेशानी को देखते हुए प्रभावित गांवों में वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था करना जरूरी होगा. खासकर उन इलाकों में, जहां ग्रामीणों के पास पेयजल के सीमित विकल्प हैं.
जरूरत होगी कि विभाग शिफ्टिंग कार्य शुरू करने से पहले प्रभावित गांवों को संभावित जलापूर्ति व्यवधान की जानकारी दे और आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करे.
