दुमका."हमें सरकारी कर्मचारी का दर्जा तो दूर, सरकार एक मजदूर मानने को भी तैयार नहीं है." यह आक्रोश शनिवार को दुमका के पुराने समाहरणालय परिसर में गूंजा, जहाँ झारखंड राज्य विद्यालय रसोइया संघ (दुमका जिला कमिटी) ने अपनी 13 सूत्री मांगों को लेकर उग्र धरना-प्रदर्शन किया.जिला सचिव सावित्री टुडू के नेतृत्व में जुटी सैकड़ों रसोइया बहनों ने सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने हक के लिए आवाज बुलंद की.इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सोलमा किस्कू ने की और संचालन दुलाड़ टुडू ने किया.
'21 सालों से चल रहा बंधुआ मजदूरी जैसा शोषण'
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संघ के जिला महासचिव सह राज्य उपाध्यक्ष भुण्डा बास्की ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि झारखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चे भूखे न रहें, इसके लिए ये रसोइया बहनें पिछले 21 वर्षों से 'प्रधानमंत्री पोषण योजना' (मध्यान्ह भोजन) के तहत खाना बना रही हैं. इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जा रही है. दोनों ही सरकारें इन महिलाओं से बंधुआ मजदूरों की तरह काम ले रही हैं, जिससे उनके भविष्य पर अब गहरा खतरा मंडरा रहा है.
निजी कंपनियों को मिड-डे मील सौंपने की तैयारी का विरोध
भुण्डा बास्की ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार अब इस 'प्रधानमंत्री पोषण योजना' को बड़े-बड़े पूंजीपतियों और निजी कंपनियों (NGOs) के हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है.उन्होंने साफ चेतावनी दी कि रसोइया संघ सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगा, लेकिन स्कूलों को उद्योगपतियों के हवाले नहीं होने देगा.प्रदर्शन के बाद, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित एक 13 सूत्री मांग पत्र जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) और दुमका उपायुक्त (DC) को सौंपा.
रसोइया संघ की 13 प्रमुख मांगे जिनपर तना है आंदोलन:
मध्यान्ह भोजन के संचालन और रसोइयों के भविष्य को लेकर संघ ने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
- निजीकरण पर रोक: मिड-डे मील कार्यक्रम को एनजीओ और निजी कंपनियों से मुक्त रखा जाए.हर 25 बच्चों के अनुपात पर एक रसोइया का चयन हो.
- ₹42,000 मानदेय: सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने तक रसोइयों को हर महीने 42 हजार रुपये का मानदेय दिया जाए.
- नौकरी की गारंटी: रसोइया कर्मियों के लिए स्पष्ट नियुक्ति नियमावली बने और उन्हें चयन पत्र/नियुक्ति प्रमाण पत्र मिले.
- ₹5 लाख का बीमा: सभी रसोइया कर्मियों के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित हो.
- त्योहार से पहले बकाया भुगतान: दुर्गा पूजा से पहले रसोइयों के सभी बकाए मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए.
- यूनिफॉर्म अलाउंस: साल में दो सेट यूनिफॉर्म के लिए हर वर्ष ₹2,000 सीधे रसोइयों के बैंक खाते में भेजे जाएं.
- रिटायरमेंट व पेंशन: 60 वर्ष की बाध्यता खत्म कर रसोइयों को पेंशन और रिटायरमेंट का लाभ देने के बाद ही सेवामुक्त किया जाए.
- आश्रितों को मुआवजा: सेवाकाल में मृत रसोइया के परिवारों को अविलंब ₹5 लाख की अनुग्रह राशि मिले.
- समय पर भुगतान व छुट्टियां: मानदेय हर महीने की 5 तारीख तक मिले। साथ ही, रसोइयों को विशेष अवकाश और मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की सुविधा मिले.
- संयोजिका का स्थायीकरण: स्कूलों में कार्यरत संयोजिका बहनों को स्थायी किया जाए और रसोइयों की तर्ज पर मानदेय मिले.
- नियमित ट्रेनिंग: रसोइया और संयोजिका को हर 6 महीने में नए मीनू और पोषण से संबंधित ट्रेनिंग दी जाए.
प्रदर्शन में ये रहे मुख्य रूप से शामिल
इस विशाल धरने में मुख्य रूप से एमेली मुर्मू, श्रीमती मरांडी, बबली टुडू, टेनीशिला हेम्बरम, महेश्वरी मुर्मू, अनिता मुर्मू, प्याली सोरेन, रानी टुडू, बिटिया हांसदा, बैकुंठ शर्मा, चंडीचरण महतो, मार्सेल टुडू, पालूस हांसदा समेत सैकड़ों की संख्या में रसोइया और संयोजिका कर्मी मौजूद रहीं.
