आदित्यनाथ पत्रलेख, बासुकिनाथ.जरमुंडी प्रखंड के हथनामा पंचायत अंतर्गत विराजपुर गांव में किसानों की सुविधा के लिए करीब 8.75 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया 5000 एमटी क्षमता का कोल्ड स्टोरेज तैयार होने के बावजूद पिछले एक साल से बंद पड़ा है. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित संवेदक ने करीब एक साल पहले ही भवन का हैंडओवर कर दिया, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड, झारखंड सरकार के माध्यम से निर्मित इस शीतगृह के शुरू होने से जरमुंडी क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की बड़ी सुविधा मिल सकती है. किसान यहां टमाटर, आलू, प्याज समेत हरी साग-सब्जियां और फल सुरक्षित रख सकेंगे. वहीं, व्यापारियों को भी सरकार द्वारा निर्धारित दर पर उत्पादों के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है.
मशीनें लगीं, जेनरेटर भी तैयार, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं
शीतगृह में आवश्यक मशीनें स्थापित कर दी गयी हैं. बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए 320 केवीए का जेनरेटर भी लगाया गया है, लेकिन अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं होने के कारण मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है. बिजली कनेक्शन समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने के कारण करोड़ों की लागत से तैयार यह शीतगृह फिलहाल उपयोग से बाहर है.
एक साल पहले ही भवन निर्माण विभाग को सौंपा गया भवन
शीतगृह का निर्माण पूरा होने के बाद भवन को संबंधित विभाग को सौंप दिया गया था. शीतगृह के संवेदक रोबिन सिंह ने बताया कि करीब एक साल पूर्व ही भवन का हैंडओवर भवन निर्माण विभाग को कर दिया गया था. इसके बाद भी संचालन शुरू नहीं हो पाया है.
पक्की सड़क नहीं, बड़े वाहनों की आवाजाही में परेशानी
शीतगृह के संचालन की जिम्मेदारी कृषि विभाग की ओर से बोकारो के एक संवेदक को दी गयी है. हालांकि, शीतगृह तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं हो सकी है. कच्ची सड़क होने के कारण बड़े वाहनों की आवाजाही में परेशानी होती है. ऐसे में किसानों की उपज लेकर ट्रकों को शीतगृह तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण होगा.
ग्रामीणों का कहना है कि शीतगृह का संचालन शुरू करने से पहले पहुंच पथ को दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि किसान आसानी से अपनी उपज यहां तक ला सकें और व्यापारियों के वाहनों की आवाजाही भी सुचारु हो सके.
भंडारण के अभाव में औने-पौने दाम पर उपज बेचते हैं किसान
जरमुंडी प्रखंड की करीब 80 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है. क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टमाटर, आलू, प्याज और विभिन्न प्रकार की हरी साग-सब्जियों का उत्पादन होता है. लेकिन उपज के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को हर साल परेशानी झेलनी पड़ती है.
फसल की अधिक पैदावार के समय जब बाजार में कीमतें गिर जाती हैं, तब किसानों के सामने उपज को सुरक्षित रखने का विकल्प नहीं होता. समय पर बाजार नहीं मिलने से सब्जियां खराब होने लगती हैं. मजबूरी में किसानों को अपनी उपज बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती है.
बाजार भाव बढ़ने तक उपज सुरक्षित रखने का मिलेगा विकल्प
किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज शुरू होने के बाद उन्हें अपनी उपज को सुरक्षित रखने का विकल्प मिलेगा. किसान बाजार में कीमत बढ़ने तक आलू, प्याज, टमाटर और अन्य उत्पादों को भंडारित कर सकेंगे. इसके बाद उचित समय पर उपज बेचकर बेहतर कीमत हासिल की जा सकती है.
इससे किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और उनकी आमदनी भी बढ़ सकती है. ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस शीतगृह के जल्द संचालन को लेकर क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें टिकी हुई हैं.
किसान कहते हैं : तत्काल शुरू कराया जाए शीतगृह
जय जय यादव, किसान ने कहा कि पांच हजार एमटी क्षमता का कोल्ड स्टोरेज बनकर तैयार है, लेकिन इसका संचालन नहीं हो रहा है. किसानों के हित में यह शीतगृह मील का पत्थर साबित हो सकता है. करोड़ों रुपये की लागत से बने इस शीतगृह को अविलंब चालू कराया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके.
राजू राय, किसान ने कहा कि फिलहाल कोल्ड स्टोरेज का किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है. इसके शुरू होने से खेतों में उत्पादित साग-सब्जी, टमाटर, प्याज और आलू को सुरक्षित रखा जा सकेगा. बाजार में कीमत बढ़ने पर उपज बेचकर किसान बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
