राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य उत्सव का आयोजन

गायन के दौरान पूरा प्रांगण “वंदे मातरम” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया.

दुमका. भारतीय जनता पार्टी दुमका जिला इकाई द्वारा शुक्रवार को शहर के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में देश के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य उत्सव का आयोजन किया गया. जिलाध्यक्ष गौरवकांत के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति की भावना का संदेश पूरे परिसर में गूंज उठा. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड भाजपा के पूर्व सांसद अभयकांत प्रसाद शामिल हुए, जबकि प्रदेश मंत्री रविकांत मिश्रा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेश मुर्मू, अनुज आर्या, कार्यक्रम प्रभारी पवन केसरी, कार्यक्रम के संयोजक धर्मेंद्र सिंह, सह संयोजक मार्शल ऋषिराज टुडू, नीतू झा विशेष रूप से मौजूद रहे. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ अंजुला मुर्मू के नेतृत्व में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न संगठन से जुड़े लोग, छात्र-छात्राओं एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. गायन के दौरान पूरा प्रांगण “वंदे मातरम” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा झारखंड के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अभयकांत प्रसाद ने कहा सन् 1923 में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली ने वंदे मातरम के गायन का विरोध किया. उन्होंने यह तर्क दिया कि इस्लाम में संगीत की कोई धार्मिक मान्यता नहीं है, इसलिए वे इस गीत का समर्थन नहीं कर सकते. उनके विरोध के बाद, अधिवेशन में वंदे मातरम गीत को पूर्ण रूप से नहीं गाया गया, बल्कि इसकी कुछ पंक्तियों को हटाकर सीमित रूप में प्रस्तुत किया गया. बाद में, सन् 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत यह तय किया गया कि वंदे मातरम गीत की केवल पहली चार पंक्तियां ही आधिकारिक रूप से गाई जाएंगी, और बाकी अंशों को हटा दिया जाएगा. श्री प्रसाद ने कहा कि यह प्रसंग इस बात का साक्षी है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक भावना और एक ऐसी शक्ति है जिसने भारत की आत्मा को स्वर दिया. विरोध और कटौती के बावजूद, यह गीत आज भी भारत की राष्ट्रभक्ति का सबसे सशक्त प्रतीक बना हुआ है. प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेश मुर्मू ने अपने वक्तव्य में कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह संकल्प था जिसने भारत की आज़ादी के मतवालों की नस-नस में जोश और देशभक्ति का संचार किया. स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में वंदे मातरम और भारत माता की जय के जयघोष ने देशभक्तों में ऐसी ऊर्जा और साहस भर दिया था कि वे मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व बलिदान को तत्पर हो उठते थे. डॉ अंजुला ने कहा कि वंदे मातरम गीत का प्रत्येक शब्द मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव जगाता है. इस गीत के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की जो भावना जागृत होती है, वही हमें सच्चे अर्थों में भारतीय बनाती है. जिलाध्यक्ष गौरवकांत ने कहा वंदे मातरम हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, सांस्कृतिक एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है. भारतीय जनता पार्टी इस गौरवशाली परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है. कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं को वंदे मातरम गीत के इतिहास और उसके राष्ट्रीय महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया गया, जिससे नयी पीढ़ी में मातृभूमि के प्रति गर्व और समर्पण की भावना को और अधिक बल मिला. जिला मीडिया सह प्रभारी नवल किस्कू ने बताया कार्यक्रम में विवेकानंद राय, श्रीधर दास, दिनेश सिंह, अजय गुप्ता, मृणाल मिश्रा, ओम केसरी, ऋषिकेश गुप्ता, अमन राज, रामकृष्ण हेंब्रम, मुरलीधर मंडल, अजय सिंह, अभिजीत सुमन, गायत्री जायसवाल, प्रधानाचार्य कुमार विमलेश, रमाकांत मौर्य, विकाश मिश्रा, आलोक रंजन, अभिषेक कुमार, प्रदीप कुमार, अमर कुमार, संतोष कुमार, श्वेता सिंह, कविता कुमारी, अंजनी कुमारी, प्रिया कुमारी, प्रीति कुमारी, अरविंद दुबे, चैताली कुमारी, जगतनारायण राय, श्याम साह, राजेश यादव, घनश्याम पंडित, संतोष साह, सुबोध मंडल, कुंदन देवी, जयश्री देवी, बैद्यनाथ भंडारी सहित अन्य कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठन के लोग शामिल हुए.

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Published by: Binay kumar

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