दुमका : दुमका के हुनर को अब बाजार से जोड़ने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कौशल विकास की नई कार्ययोजना तैयार होगी. स्थानीय जरूरत, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा. शनिवार को उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में हुई जिला कौशल विकास समिति की बैठक में इसको लेकर विभिन्न विभागों की जरूरतों और प्रशिक्षण की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई.
विभागवार जरूरत चिन्हित करने का निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों से उनके क्षेत्र में कौशल विकास की जरूरतों और संभावनाओं की जानकारी ली. उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे कार्य और गतिविधियां चिन्हित करने का निर्देश दिया, जहां कुशल मानव संसाधन की जरूरत है. विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर रोजगारपरक और आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण की समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
डोकरा और बांस उत्पाद पर विशेष फोकस
उपायुक्त ने दुमका की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया. डोकरा ब्रांज और एडवांस्ड बैम्बू प्रोडक्ट के लिए विशेष प्रशिक्षण कराने का निर्देश दिया. स्थानीय कारीगरों और युवाओं को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, गुणवत्ता, उत्पाद विकास और पैकेजिंग के साथ बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देने की बात कही गई. इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने के साथ रोजगार और आय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.
ईवी तकनीक में तैयार होंगे युवा
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ईवी क्षेत्र में प्रशिक्षण की जरूरत पर भी चर्चा हुई. उपायुक्त ने ईवी वाहनों की तकनीकी समस्याओं के समाधान, रखरखाव और मरम्मत के लिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया. इससे इस उभरते क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकेंगे.
माइनिंग क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन
माइनिंग क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सके.
आदिवासी युवाओं के हुनर को तकनीक का साथ
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि आदिवासी युवाओं की क्षमता, रुचि और स्थानीय हुनर को ध्यान में रखकर कौशल विकास कार्यक्रम तैयार किए जाएं. पारंपरिक ज्ञान और कौशल को आधुनिक तकनीक तथा रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया गया. प्रशिक्षण में स्थानीय कला, हस्तशिल्प, कृषि आधारित गतिविधियों, तकनीकी कार्यों और उभरते रोजगार क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया.
प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को विभागवार जरूरतों और सुझावों का संकलन कर समन्वित कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया. बैठक में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और जिला कौशल विकास समिति के सदस्य मौजूद थे.
