काठीकुंड: नवप्राथमिक विद्यालय झिली में पढ़ने वाले 27 बच्चे इन दिनों जर्जर भवन के बीच शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं. विद्यालय भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा है. कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़कर नीचे गिर चुका है. वहीं बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है.
भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और इस कारण बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को विवश हैं. जानकारी के अनुसार, विद्यालय का वर्तमान भवन वर्ष 2002-03 में बनाया गया था.
निर्माण के करीब दो दशक से अधिक समय बीतने के बाद बीते कुछ वर्षों से भवन की हालत अत्यंत जर्जर हो गयी है. छत और दीवारों से लगातार प्लास्टर झड़ने के साथ कई हिस्सों में भवन क्षतिग्रस्त हो चुका है. इसका असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. बुधवार को बच्चे विद्यालय परिसर के बाहर जमीन पर चटाई और बोरे बिछाकर पढ़ाई करते नजर आए. छोटे-छोटे बच्चे खुले में बैठकर कॉपी-किताब लेकर पढ़ने को मजबूर हैं.
बारिश में टपकने लगता है छत से पानी :बच्चों ने बताया कि बारिश होने पर विद्यालय की छत से पानी आने लगता है. ऐसे में कक्षा के भीतर बैठना मुश्किल हो जाता है. पानी के कारण किताब-कॉपियां भीगने का खतरा रहता है और पढ़ाई भी बाधित होती है. बारिश के दौरान बच्चों को सुरक्षित जगह पर बैठाना चुनौती बन जाता है.
छत से झड़ता प्लास्टर, हादसे का खतरा :विद्यालय की छत और दीवारों से प्लास्टर झड़ने की स्थिति को लेकर सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा की है. कक्षा में जगह-जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ है और उसके टुकड़े फर्श पर दिखायी देते हैं. ऐसे में यदि छत या दीवार का कोई बड़ा हिस्सा अचानक गिरता है तो छोटे बच्चों के चोटिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
27 बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर :विद्यालय में वर्तमान में 27 बच्चे नामांकित हैं. ग्रामीण क्षेत्र के इन बच्चों की शिक्षा सीमित संसाधनों के बीच चल रही है. ऐसे में भवन की खराब स्थिति उनकी पढ़ाई में एक और बाधा बन रही है. सुरक्षित और व्यवस्थित कक्षा उपलब्ध नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
क्या विभाग को हादसे का है इंतजार?ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि संबंधित विभाग विद्यालय भवन का तत्काल निरीक्षण कराए. भवन की तकनीकी जांच कराकर उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए. यदि भवन मरम्मत योग्य है तो तत्काल आवश्यक मरम्मत करायी जाए और यदि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नए भवन या वैकल्पिक कक्षा की व्यवस्था की जाए. ग्रामीणों का कहना है कि किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने की बजाय विभाग को समय रहते पहल करनी चाहिए.
निकट के सरकारी भवन में जल्द होगा विद्यालय का संचालन
विद्यालय की जर्जरता संज्ञान में है. इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश भी प्राप्त हुआ है कि निकट किसी सरकारी भवन में विद्यालय को तत्काल हस्तांतरित किया जाए. भवन मिलने के साथ ही जल्द विद्यालय का संचालन उक्त भवन में किया जाएगा.
