दुमका : प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रकाश झा की अदालत ने नाबालिग का अपहरण कर उससे विवाह करने के मामले में शिकारीपाड़ा निवासी सुकलाल मुर्मू को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने आरोपी को भादवि की धारा 363 के तहत तीन वर्ष छह माह के कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. हालांकि, अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है.
नौ गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल नौ गवाहों की गवाही करायी गयी. गवाहों के बयान एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनायी.
मेला देखने गयी 14 वर्षीय किशोरी नहीं लौटी घर
अभियोजन का मामला है कि 15 नवंबर 2022 को पीड़िता की मां ने रानेश्वर थाना में लिखित शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत में बताया गया कि 27 अक्टूबर 2022 को शाम करीब पांच बजे उसकी करीब 14 वर्षीय पुत्री काली मेला देखने के लिए भिलाई पानी, शिकारीपाड़ा गई थी, लेकिन वापस घर नहीं लौटी. अगले दिन 28 अक्टूबर 2022 को परिवार के लोग उसकी तलाश कर रहे थे. इसी दौरान जानकारी मिली कि करीब 25 वर्षीय सुकलाल मुर्मू उसे जबरन इस आशय से अपने साथ ले गया है कि उससे विवाह करेगा.
पहले से विवाहित था आरोपी, नाबालिग से विवाह का आरोप
अभियोजन के अनुसार, आरोपी पहले से ही विवाहित था. इसके बाद पीड़िता की मां अपने परिवार के सदस्यों के साथ सुकलाल मुर्मू के घर पहुंची, जहां आरोप है कि सुकलाल मुर्मू एवं बसंती हांसदा ने उनके साथ गाली-गलौज एवं दुर्व्यवहार किया. 12 नवंबर 2022 को परिजन दोबारा सुकलाल मुर्मू के घर पहुंचे, जहां पता चला कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता से विवाह कर लिया है.
20 साल की सजा और 15 हजार रुपये जुर्माना
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाह प्रस्तुत किए गए. गवाहों के बयान एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुकलाल मुर्मू को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं कुल 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
