बासुकिनाथ.विश्व प्रसिद्ध बासुकिनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां सावन के महीने में देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा फौजदारीनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए पहुंचते हैं. इसके बावजूद जरमुंडी प्रखंड क्षेत्र के आसपास स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनेक स्थल आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.
क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाएं होने के बावजूद सरकारी उदासीनता के कारण इन स्थलों का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है. बासुकिनाथ को केंद्र में रखकर पर्यटन सर्किट विकसित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है.
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के हैं कई स्थल
जरमुंडी प्रखंड क्षेत्र में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कई स्थल मौजूद हैं. इनमें महाभारतकालीन पांडवेश्वरनाथ मंदिर, बाबा वरदानीनाथ मंदिर, केशरी सूर्य मंदिर, नीमानाथ मंदिर, शुम्भेश्वरनाथ मंदिर और जमधरा शिव मंदिर प्रमुख हैं. इन स्थलों की धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. सड़क, पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश और अन्य पर्यटन सुविधाओं के अभाव में इन स्थलों की पहचान सीमित दायरे तक सिमट कर रह गई है.
झारखंड विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
बासुकिनाथ क्षेत्र को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का मुद्दा झारखंड विधानसभा में भी कई बार उठाया जा चुका है. पर्यटन विभाग की ओर से पूर्व में इन स्थलों के विकास को लेकर प्रस्ताव तैयार किए जाने और सर्वे कराए जाने की बात भी सामने आई थी. कुछ मंदिरों के आसपास पर्यटन विकास के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो सका. कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन ऐतिहासिक स्थलों के विकास की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हो पाया.
पर्यटन सर्किट से बदल सकती है क्षेत्र की तस्वीर
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बासुकिनाथ को केंद्र में रखकर आसपास के सभी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ते हुए पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए, तो पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. बाबा फौजदारीनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इन स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, तो वे अपनी सुविधा के अनुसार वहां भी पहुंच सकते हैं.
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी बन सकता है.
ऐतिहासिक मंदिरों और धार्मिक स्थलों का संरक्षण एवं विकास होने से क्षेत्र की धार्मिक विरासत को पहचान मिलेगी. जरूरत है कि सरकार और पर्यटन विभाग पुराने प्रस्तावों और सर्वे को आगे बढ़ाते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की, ताकि बासुकिनाथ सहित जरमुंडी क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सके.
