दुमका. पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा संताल परगना के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अध्यक्ष असीम कुमार मंडल की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके खिजुरिया स्थित आवास पर मुलाकात कर पिछड़ा वर्ग से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को लेकर मांग पत्र सौंपा. इस दौरान मोर्चा के केंद्रीय प्रधान महासचिव अमरेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद से ही दुमका सहित सात जिलों लातेहार, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी एवं पश्चिम सिंहभूम में पिछड़ा वर्ग को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण से वंचित कर दिया गया है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है. इससे इन जिलों में रहने वाले पिछड़ा वर्ग के युवाओं को गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से इस मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग की. इस अवसर पर मोर्चा के कोषाध्यक्ष अजित कुमार मांझी, जिलाध्यक्ष जयकांत जायसवाल, अशोक मंडल, प्रमोद मंडल, बबलू यादव, विजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे. मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गयी प्रमुख मांगें : झारखंड में जातिगत जनगणना कराकर पिछड़ा वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए. पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा के आलोक में दुमका सहित पूरे झारखंड राज्य में पिछड़ा वर्ग को 36 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू किया जाए. प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को अनावश्यक रूप से 300 से 400 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र देकर प्रताड़ित किए जाने की प्रक्रिया बंद की जाए और परीक्षा केंद्र गृह जिला अथवा समीपवर्ती जिलों में निर्धारित किए जाएं. दुमका जिले में पिछड़ा वर्ग की छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास की समुचित व्यवस्था की जाए. पंचायत को इकाई मानकर अनुसूचित क्षेत्रों का निर्धारण करते हुए सभी एकल पदों पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे पिछड़ा वर्ग को मुखिया, प्रमुख एवं जिला परिषद अध्यक्ष बनने का अवसर मिल सके. प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल तथा प्रत्येक प्रखंड में डिग्री कॉलेज का निर्माण कराया जाए.
पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा ने की शिक्षा व नौकरी में समुचित आरक्षण की मांग
कहा कि दुमका सहित सात जिलों लातेहार, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी एवं पश्चिम सिंहभूम में पिछड़ा वर्ग को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण से वंचित कर दिया गया है.
