विस्थापन, प्रदूषण व दुघर्टनाओं के खिलाफ होगा आंदोलन : सीपीएम

मोदी सरकार द्वारा कार्पोरेट घरानों को कोल ब्लाॅकों की नीलामी की जा रही है. बड़ी समस्या यहां कोयला कंपनियों द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कोयले का उत्खनन करने के बाद उसके परिवहन से आ रही है.

दुमका. संताल परगना क्षेत्र में जमीन का सवाल एक प्रमुख सवाल है क्योंकि देशी विदेशी कंपनियों और कार्पोरेट घरानों की नजर यहां की खनिज संपदा पर है. हाल ही में यहां निजी कंपनियों को कोयला खनन के लिए कोल ब्लाॅक आवंटित किए गए हैं. ये निजी कोल कंपनियां यहां के आदिवासियों और अन्य गरीबों की जमीन की रक्षा के लिए बने संताल परगना काश्तकारी कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रैयतों के जमीन की लूट जारी रखे हुए हैं. अमड़ापाड़ा के पचुआड़ा नॉर्थ कोल ब्लाक के समीप बसे गांवों में इन दलालों का इतना आतंक है कि आम आदिवासी रैयत कंपनी के खिलाफ मुंह तक नहीं खोलते हैं. दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम कोल इंडिया की कंपनी ईसीएल ने भी कोयला खनन का काम आउटसोर्सिंग कंपनियों के हवाले कर दिया है जिन्हें न तो कामगारों के हितों की परवाह है और न ही रैयतों के अधिकारों की. यह बात आज सीपीएम की संताल परगना रीजनल कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए सीपीएम की वरिष्ठ नेता बृन्दा कारात ने कही. पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा कार्पोरेट घरानों को कोल ब्लाॅकों की नीलामी की जा रही है. बड़ी समस्या यहां कोयला कंपनियों द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कोयले का उत्खनन करने के बाद उसके परिवहन से आ रही है. कोयला के परिवहन में सैकड़ों वाहन कोयले की धूल उड़ाते हुए राजमार्ग से गुजरते हैं जिसके चलते भारी प्रदूषण हो रहा है और कभी हरा-भरा दिखने वाला यह इलाका कोयले के काले डस्ट से रोड के किनारे बसे गांवों को अपने आगोश में ले लिया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कोयले को ढंक कर ले जाने और रास्ते में पानी का छिड़काव करने का दिशा-निर्देश केवल कागजों तक सीमित रह गया है. कोयला परिवहन से उड़ने वाली काले गर्द के उड़ने से वातावरण में कोयले के महीन कणों की मौजूदगी से लोगों को श्वांस की बीमारी हो रही है. इसके अलावा अनियंत्रित बड़े वाहनों के परिचालन से रोज दुघर्टनाएं भी होती हैं. कोयला की ढुलाई से अगल बगल के इलाके की खेती भी चौपट हो रही है.इस ज्वलंत मुद्दे पर सीपीएम की दुमका और पाकुड़ जिला कमेटी की संयुक्त बैठक में गहन चर्चा कर आंदोलन की कार्ययोजना बनायी गयी. बैठक में सीपीएम की वरिष्ठ नेता बृन्दा कारात ने भी दिशानिर्देश दिया. बैठक की अध्यक्षता पार्टी के जिला सचिव सुभाष हेम्ब्रम ने की. बैठक में सचिवमंडल सदस्य एहतेशाम अहमद, शिवानी पाल, प्रफुल्ल लिंडा, डा. काशीनाथ चटर्जी,प्रतीक मिश्र, अशोक साह, जिला कमेटी सदस्य अखिलेश कुमार झा, अमरेश कुमार, गजेन्द्र कुमार, दिनेश्वर डेहरी, देवी सिंह पहाड़िया, संतोष कुमार किस्कू, सनातन डेहरी, विद्यानंद राय पाकुड़ के जिला सचिव गोपीन सोरेन, मानिक दुबे, सैफुद्दीन शेख समेत पार्टी के अन्य लोग शामिल थे. बैठक में संताल हूल की 170वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम किए जाने का निर्णय लिया गया.

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Published by: Rakesh kumar

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