प्रतिनिधि, रानीश्वर.
रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र में सरकारी नौकरी करने वाले तथा अन्य अपात्र लोगों द्वारा लाल व ग्रीन राशन कार्ड के साथ मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का लाभ लेने की शिकायत मिलने पर शनिवार को बीडीओ राजेश कुमार सिन्हा ने बीएसओ के साथ विभिन्न गांवों का दौरा कर शिकायतों का सत्यापन किया. जांच के दौरान कई मामलों में अनियमितता सामने आने पर संबंधित लाभुकों का योजना का लाभ तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है. साथ ही गलत तरीके से लाभ लेने और राशन कार्ड बनवाने के मामले में राशि वसूली के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
जांच के क्रम में हरिपुर पंचायत के पुतका गांव में तापस दास की पत्नी नीतु कुमारी का सत्यापन किया गया. जांच में पाया गया कि नीतु कुमारी मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना का लाभ ले रही थीं, जबकि उनके पति तापस दास आसनसोल में भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं. इसके बावजूद परिवार लाल राशन कार्ड के तहत खाद्यान्न भी प्राप्त कर रहा था. इसके बाद बिलकांदी पंचायत के जयताड़ा गांव निवासी पार्थप्रतीम गोस्वामी की पत्नी शिल्पी चक्रवर्ती का सत्यापन किया गया. जांच में सामने आया कि ग्रीन राशन कार्ड बनवाकर मंईयां सम्मान योजना का लाभ लिया जा रहा था, जबकि पार्थप्रतीम गोस्वामी सरकारी शिक्षक हैं.
दक्षिणजोल पंचायत के सूजापनपुर गांव की रिया घोष के मामले में भी जांच के दौरान पता चला कि उनका विवाह एक सरकारी शिक्षक से हुआ है, फिर भी वह मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना का लाभ ले रही थीं. बीडीओ ने बताया कि जांच के दौरान दो पारा शिक्षकों की पत्नियां, चार पोषण सखी, एक एएनएम तथा एक चौकीदार की पत्नी द्वारा भी मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना का लाभ लेने का मामला सामने आया. सभी मामलों में योजना का लाभ तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है. इसके अलावा पाथरा पंचायत की रीमा चंद्र के मामले में जांच के दौरान पाया गया कि उन्होंने योजना का लाभ लेने के लिए लाल राशन कार्ड का दस्तावेज प्रस्तुत किया था.
योजना का लाभ मिलने के बाद लाल कार्ड से नाम हटाकर ग्रीन कार्ड बनवा लिया गया. वर्तमान में पति के नाम पर लाल कार्ड और पत्नी के नाम पर ग्रीन कार्ड है, जबकि दोनों एक ही दो मंजिला मकान में साथ रहते हैं और राशन का लाभ भी ले रहे हैं. इस मामले में भी राशि वसूली के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है. बीडीओ राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि अपात्र लोगों द्वारा सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ लेने के मामलों की जांच लगातार जारी रहेगी. जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लाभुकों से राशि की वसूली की जाएगी तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी.
