जब्त कोयला व लकड़ी.
वर्षों से रामगढ़ के इलाके में हो रहा कोयले का अवैध उत्खनन
रामगढ़ : इलाका अवैध कोयला उत्खनन के मामले में वर्षों से सुर्खियों में है. रामगढ़ से पोड़ैयाहाट जाने वाले रास्ते में बांसलोई नदी व उसके किनारे बड़े पैमाने पर कोयला का उत्खनन किया जाता है. सबको इसकी खबर है लेकिन इसपर आज तक कार्रवाई नहीं हुई. संताल परगना के कई बड़े सफेदपोश इस धंधे में अपनी पूरी भागीदारी निभाते हैं. रायाडीह के पास इन कोयलों को डंप किया जाता है और बड़े बड़े वाहनों में लाद कर पाकुड़ के रास्ते बंगाल व पोड़ैयाहाट के रास्ते बिहार भेजा जाता है. इस कार्य में हर दिन दर्जनों की संख्या में मजदूर अहले सुबह से कोयला खुदाई में जुट जाते हैं. सूत्रों की मानें तो 24 घंटे यहां कोयला खुदाई का काम होता है. सुनसान इलाका होने के कारण यहां लोगों की आवाजाही नहीं होती है. इसका फायदा माफिया उठाते हैं.
सुगम है रास्ता : यहां से कोयला ढुलाई करना बेहद आसान है. जिन रास्तों से कोयला बिहार व बंगाल भेजा जाता है वह सुगम है. बिहार कोयला पोड़ैयाहाट होकर डांडै के रास्ते बिहार भेजा जाता है. जबकि पश्चिम बंगाल के लिए पाकुड़ के रास्ते भेजा जाता है. इन रास्तों में ट्रकों व सवारी को पास कराने के लिए अलग से माफिया के गुर्गे लगे रहते हैं.
सफेदपोशों का बरदहस्त : रामगढ़ के इलाके में हो रहे कोयले के अवैध खनन व उसके प्रेषण करने वाले माफियाओं को संताल परगना के बड़े सफेदपोशों का बरदहस्त प्राप्त है. सूत्रों की मानें तो इस खनन के एवज में नक्सलियों को भी बड़ी राशि दी जाती है. जो इस इलाके में उनकी सेफ्टी बनकर रहते हैं.
एक तरफ रायाडीह, दूसरी ओर परगोडीह
बांसलोई नदी दुमका जिले के रामगढ़ तथा गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र को बांटती है. इस ओर रामगढ़ का रायाडीह गांव है, तो दूसरी ओर पोड़ैयाहाट का परगोडीह. पहले कोयले को डंप करने के लिए परगोडीह, दामोडीह, केंदुआ तथा बोडनिया घाट का उपयोग किया जाता था. पर यातायात सुगम हो जाने की वजह से कोयला माफियाओं ने रायाडीह को इसके लिए डंपिग सेंटर तैयार कर दिया है. यहां आलूबेड़ा से कोयले को ट्रैक्टर आदि में अमड़ापाड़ा, सुंदरपहाड़ी व पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्रों से होकर कोयला पहुंचता है.
ऐसे करता है डंप कि दूर से नहीं दिखता कोयले का ढेर
जिस जगह कोयले को डंप किया जाता है, वह मैदानी जगह है. आसपास ताड़ व खजूर के उंचे-उंचे पेड़ हैं. पेड़ के नीचे ही कोयले के ढेर लगाये जाते हैं, जिन्हें ताड़ के पत्तों से ढंक कर रखा जाता है. रात के वक्त ट्रकों में इस कोयले को लादा जाता है और उसे बिहार भेजा जाता है.
