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आयोजन. संतालपरगना का 161वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया, वक्ताओं ने कहा कहा, रैयतों को अपनी भूमि पर आय सृजन के लिये मिले और अधिकार अधिकार नहीं मिले तो रैयत साधारण किसान या मजदूर बनकर रह जायेंगे दुमका : संताल परगना के 161वें स्थापना दिवस को ग्राम प्रधान मांझी संगठन द्वारा समारोहपूर्वक मनाया गया. अवसर […]

आयोजन. संतालपरगना का 161वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया, वक्ताओं ने कहा

कहा, रैयतों को अपनी भूमि पर आय सृजन के लिये मिले और अधिकार
अधिकार नहीं मिले तो रैयत साधारण किसान या मजदूर बनकर रह जायेंगे
दुमका : संताल परगना के 161वें स्थापना दिवस को ग्राम प्रधान मांझी संगठन द्वारा समारोहपूर्वक मनाया गया. अवसर पर एक रैली निकाली गयी तथा सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरांत इंडोर स्टेडियम में एक सभा का आयोजन किया गया. संगठन के प्रमंडलीय अध्यक्ष भीम मंडल ने संतालपरगना काश्तकारी अधिनियम 1949 (पूरक) की धारा 13-1 क एवं ख तथा 2 में निहित प्रावधानों के अलावा रैयतों को अपनी जोत की भूमि पर आय सृजन करने व अन्य कार्यों के लिए उपयोग करने हेतु और अधिक अधिकार देने की मांग की. कहा कि ऐसे अधिकार नहीं मिले
तो रैयतों के वंशजों को सिर्फ एक साधारण किसान या मजदूर बनकर ही रहने के लिए विवश होना पड़ेगा. अधिकार दिये जाने से उच्च योग्यताधारी व शिक्षित बेरोजगार अपनी भूमि पर रोजगार का सृजन किया जा सकेगा. सभा को प्रो शर्मिला सोरेन, प्रमंडलीय सचिव श्रीकांत मंडल, रुसोराम बास्की, पानखिली टुडू, एलिजाबेथ सोरेन, देवी हांसदा, वरुण कुमार राय, शक्तिपद दत्त, विभूति भूषण यादव, सोनामुनी मुर्मू, रानी किस्कू, करौं देवघर के पुरुषोत्तम कुमार मिश्र, कविता देवी, मीरु हांसदा, शाहजहां मियां, कासिम अंसारी, शंकर पद मंडल, श्याम सुंदर थानदार, सुशील सोरेन, राम प्रसाद राय, स्अेफन हांसदा, राहेल रीता मुर्मू, बाहा टुडू, सुशील मुर्मू, ब्रजेंद्र कुमार ठाकुर, आशुतोष महतो, छविलाल यादव आदि शामिल थे.
संप के 161वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन ग्राम प्रधान मांझी संगठन के सदस्य.

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