नोटबंदी साइड इफेक्ट . किसान रुपये के अभाव में नहीं कर पा रहे रबी फसल की खेती
28 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति सामान्य नहीं
मसलिया : केंद्र सरकार द्वारा कालेधन पर रोक लगाने के उद्देश्य नोटबंदी किये जाने के बाद अब गांव में धान की कीमत में गिरावट आ गयी है. जिस कारण किसान वर्ग के लोग मायूस व परेशान दिख हैं. नोटबंदी के 28 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति सामान्य नहीं होने के कारण किसान रुपये के अभाव में रबी फसल की खेते नहीं कर पा रहे हैं.
किसान खेती करने के लिए धान को गांव के दुकानों में बेचने तो जा रहे हैं लेकिन कीमत कम होने के कारण उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है. किसानों को मजबूरन मात्र 850 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अपने धान को बेचना पड़ रहा है. किसानों ने बताया की पिछले साल धन की कीमत बाजार में 1450 रुपये प्रति क्विंटल थी. पर इस वर्ष नोटबंदी के कारण धान की कीमतों में गिरावट आ गयी है.
850 रुपये की दर से बेचना पड़ रहा धान
क्या कहते हैं किसान
नोटबंदी के कारण सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के किसान प्रभावित है. खरीफ धान की खेती करने के बाद उपजाये गये धान को बाजार में बेचकर उस राशि से सरसों,आलू,गेहुं की खेती करते है. पर धान की कीमत घट जाने के कारण ना ही रबी फसल के लिए ना बीज खरीद पा रहे है और न खाद
शिवधन हेंब्रम.
नोटबंदी हो जाने के कारण किसानों का धान बाजार में नहीं बिक रहा है. उंची दाम में खाद व बीज खरीदकर खरीफ फसल धान की खेती की. और अब ओने पोने दाम में धान को बाजार में बेचकर किसी तरह अपना परिवार चला रहे है.
राजीव मंडल
हम एक साधारण किसान है. खरीफ की खेती कर धान उपजाने गये फसल को बेचकर ही रबी की खेती करते है. नोटबंदी के कारण धान बेचकर भी पैसा नहीं मिल रहा है. जिस कारण रबी खेती के साथ परिवार चलाने में परेशानी हो रही है.
चंडीचरण महतो.
