रामगढ़. आदिवासी संघर्ष मोरचा द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के विरूद्ध बुलाये गये झारखंड बंद का रामगढ़ बाजार में बंद को कोई प्रभाव नहीं पड़ा, पर ठाड़ीहाट मोड़ के पास एक चाय दुकान पर बैठे कांग्रेसी नेता वारिश मुर्मू व उनके सहयोगी चुंडा मुर्मू को रामगढ़ थाना प्रभारी द्वारा हिरासत में ले लेने के बाद आसपास गांवों के आदिवासी उग्र हो गये. वहीं कड़बिंधा, सुसनिया, ठाकोडीह आदि गांवों के सैकड़ों आदिवासी, महिला, पुरुष तीर-धनुष, टांगा, हसुवा, लाठी-डंडा लेकर गोड्डा-रामगढ़ सड़क मार्ग के बीचों-बीच बैठकर राज्य सरकार एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. सुबह 10 से 2 बजे तक सड़क जाम रहा.
दल-बल के साथ स्थानीय पुलिस कड़बिंधा पहुंची. विरोध कर रहे लोग हिरासत में लिये गये नेता को छोड़ने की मांग करने लगे. स्थिति नाजुक देखते हुए थाना प्रभारी मनोज कुमार राय ने गिरफ्तार नेता वारिश मुर्मू व चुंडा मुर्मू को रिहा कर दिया. रिहाई के बाद भी ग्रामीण थाना प्रभारी से वारिश मुर्मू को हिरासत में लेने का कारण जानना चाह रहे थे. स्थिति बिगड़ते देख थाना प्रभारी ने जिला प्रशासन से मदद मांगी. सूचना पर डीएसपी रौशन गुड़िया दर्जनों जवानों को लेकर कड़बिंधा पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली. प्रशासन ने हर तरह से आदिवासियों को समझाया, लेकिन आक्रोशित लोग ढोल-नगाड़ा बजाते हुए इसका विरोध करने लगे. बाद में जमादार भगत हांसदा ने नेताओं से थाना प्रभारी की ओर से माफी मांगी.
वहीं नेता ने पुलिस को सचेत किया कि भविष्य में पुलिस किसी गांव में घुसने से पहले ग्राम प्रधान से इजाजत लें. थाना प्रभारी मनोज राय ने बताया कि शांति व्यवस्था रखने के लिए उन्होंने कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष को हिरासत में लिया था. मकसद किसी को परेशान करना नहीं करना था. मौके पर जामा थाना प्रभारी फाल्गुनी पासवान, जोनल मजिस्ट्रेट प्रकाश लकड़ा सहित दर्जन पुलिस जवान मौजूद थे. वहीं बंद के दौरान रामगढ़ बाजार, दुकान, दवा दुकान, अस्पताल, स्कूल खुले रहे, लेकिन वाहन का परिचालन ठप रहा.
