रोष . घोषित स्थानीय नीति के विरुद्ध रैयतों का फूटा आक्रोश
दुमका : रघुवर सरकार द्वारा घोषित स्थानीय नीति तथा सीएनटी-एसपीटी एक्ट के संशोधन के विरुद्ध विरोध का दौर जारी है. बुधवार को इसी क्रम में सरुवा गांव के मंडल टोला में रैयतों ने बैठक की. बैठक में जनजातीय परामर्शदात्री परिषद (टीएसी) द्वारा सीएनटी और एसपीटी एक्ट के संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दिये जाने के विरुद्ध ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सह टीएसी के अध्यक्ष रघुवर दास, उपाध्यक्ष डॉ लोइस मरांडी, विधायक शिवशंकर उरांव, राजकुमार पहान, लक्ष्मण टुडू, केन्द्रीय सरना समिति अध्यक्ष फूलचंद तिर्की और टीएसी के अन्य उन तमाम सदस्यों का पुतला फूंका गया, जो इस संशोधन का समर्थन करते हैं.
रैयतों ने कहा कि सीएनटी और एसपीटी एक्ट सिर्फ आदिवासियों को ही नहीं हम सभी रैयत गैर आदिवासी मूलवासियों को भी प्रभावित करेगा. कहा कि सीएनटी व एसपीटी एक्ट कही भी विकास में बाधक नहीं है. अगर यह विकास में बाधक होते तो आज झारखंड में बड़ी-बड़ी फैक्ट्ररी, बांध, डैम, सड़क, केनाल, खदान, माइंस, रेलमार्ग, आंगनबाड़ी, स्कूल का अस्तित्व ही नहीं होता. सरकार को सीएनटी और एसपीटी एक्ट के संशोधन की नहीं बल्कि विकास के नाम विस्थापितों के बारे में सोचने की जरूरत है.
जिन्हें आज तक उचित न्याय नहीं मिला है. ग्रामीणों ने कहा कि सीएनटी और एसपीटी एक्ट के संशोधन और काला स्थानीयता नीति का समर्थन करने वालीं राजनीतिक पार्टियां और नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जायेगा. जो नेता या पार्टी 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति की मांग तथा सीएनटी और एसपीटी एक्ट के संशोधन का विरोध नहीं करेंगे . मौके पर जिया राम मंडल, सोनू भंडारी,नाटू साह,चन्द्रकांत मंडल, गुड्डू रॉय,
निवास यादव, सीताराम मंडल, दिलीप कुमार रॉय, निर्मल कुमार मंडल, भोला कुमार मंडल, तीसनाथ मंडल, दिलीप कुमार भंडारी, मनोज कुमार भंडारी, तुलसी देवी, आरती देवी, चैना देवी, तेतरी पुजहर, धर्मदेव पुजहर, गोपी पुजहर, पीटर हेम्ब्रम, अजित भंडारी, अटल हेम्ब्रम, सुभाष चन्द्र मरांडी, हीरालाल मंडल, भागीरथ मंडल व जीवन सोरेन समेत अन्य मौजूद थे.
सीएनटी-एसपीटी के रहते भी होता रहा है राज्य का विकास : रैयत
सरुवा गांव में टीएसी सदस्यों का पुतला दहन करते रैयत.
