जिले में 48.33 प्रतिशत धनरोपनी का काम पूरा

बारिश थमने के बाद में आयी तेजी, सात प्रतिशत क्षेत्र में नहीं लग पाया बिचड़ा

दुमका. दुमका जिले में धान की खेती ही कृषकों के लिए सबसे मुफीद है. धान की खेती प्रभावित होने मात्र से यहां के किसानों की स्थिति बिगड़ जाती है. इस वर्ष धान व मकई के आच्छादन लक्ष्य पर गौर करें तो 23 जुलाई तक जिले में धान की रोपनी का काम काफी पीछे है. इसकी फिक्र किसानों के साथ सरकारी तंत्र को भी है. दरअसल, पिछले दिनों अपेक्षित बारिश न होने से किसान बिचड़ा तैयार नहीं कर पाये थे. जब बिचड़ा तैयार हो गया, तो बारिश इतनी होने लगी कि रोपनी संभव नहीं था. जल-जमाव की वजह से धान के लगाये गये पौधे डूबने लग जा रहे थे. ऐसे में किसान बारिश थमने का इंतजार कर रहे थे. अब जबकि बारिश लगभग थम गयी है, तो लोग धनरोपनी के काम में जुट गये हैं. चिंताजनक बात यह भी है कि सात प्रतिशत क्षेत्र में अब भी किसान बिचड़ा तैयार नहीं कर पाये हैं. ऐसे में जिन किसानों ने बिचड़ा ही तैयार नहीं किया है, वे अनुकूल वातावरण और खेत में पर्याप्त नमी के बावजूद आखिर कैसे रोपाई करेंगे. अब अगर बीज डालेंगे, तो उन्हें 10-12 दिन इंतजार करना होगा. हालांकि सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक मक्का व धान का आच्छादन अपेक्षाकृत संतोषजनक बताया जा रहा है. धान के आच्छादन की स्थिति धान बिचड़ा की स्थिति हेक्टेयर में प्रखंड — अनुमानित लक्ष्य-उपलब्धि दुमका — 1130 — 985 जामा — 1165– 1090 जरमुंडी — 1185–1105 मसलिया -1045– 980 रानीश्वर — 1415 – 1379 शिकारीपाड़ा — 990– 910 सरैयाहाट – 1320- 1230 रामगढ़ –1210— 1115 काठीकुंड — 820– 760 गोपीकांदर — 820– 753 कुल—11100—10307 कुल धान का आच्छादन प्रखंड–अनुमानित लक्ष्य — उपलब्धि दुमका –11300–4481 जामा –11650–5015 जरमुंडी –11850–8465 मसलिया –10450–4043 रानीश्वर –14150–9146 शिकारीपाड़ा –9900-4380 सरैयाहाट -13200–5740 रामगढ़ –12100-5595 काठीकुंड -8200-3352 गोपीकांदर –8200–3430 कुल—111000–53647

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Published by: Rakesh kumar

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