जहां तक मन है, वहां तक माया का विस्तार : स्वामी परेशानंद

25वें वार्षिक अधिवेशन पर दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और प्रवचन से आध्यात्मिक माहौल दिखा.

बनियारा गांव में महर्षि मेंहीं संतमत सतसंग का 25 वां अधिवेशन संपन्न. प्रतिनिधि, हंसडीहा. सरैयाहाट प्रखंड के बनियारा गांव में आयोजित महर्षि मेंहीं संतमत सत्संग का रविवार को भक्ति, आध्यात्म और अनुशासन के माहौल में समापन हो गया. 25वें वार्षिक अधिवेशन पर दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और प्रवचन से आध्यात्मिक माहौल दिखा. मुख्य अतिथि महर्षि मेंहीं संतमत आश्रम के स्वामी परेशानंद जी महाराज थे, उनके साथ स्वामी अरण्यानंद जी महाराज, स्वामी निरंजनानंद जी महाराज, स्वामी गणेशानंद जी, स्वामी ब्रह्मचारी हरिनंदन बाबा एवं स्वामी नीलांबर राही भी थे. स्वामी परेशानंद जी महाराज ने कहा कि जहां तक मन है, वहां तक माया का विस्तार है. जीवात्मा स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण और केवल शरीर के भीतर निवास करती है. शरीर का त्याग ही अविनाशी सुख की प्राप्ति का मार्ग है. उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, मद और लोभ मनुष्य को अधोगति की ओर ले जाते हैं, जबकि साधक जब भीतर के ‘विन्दु’ का साक्षात्कार करता है, तब उसे परमात्मा के सूक्ष्म स्वरूप का अनुभव होता है. सत्संग में बनियारा, कसवा, धनबई, मंडलडीह, बंदरी, रंगानियां, सरैयाहाट, गोयठावरण, महादेवगढ़ समेत दर्जनों गांवों से श्रद्धालु पहुंचे. आयोजन के दौरान भोजन, आवास और पेयजल की समुचित व्यवस्था सत्संग समिति व ग्रामीणों द्वारा की गयी. कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष रामप्रसाद मंडल, मंत्री हरदेव साह, व्यवस्थापक मुरली मोहन मंडल, सुभाष भगत, मेघु मंडल, राजेंद्र पंडित, देवेंद्र मंडल, नरेश पंजियारा, सीताराम सुमन, महेंद्र राय, महेंद्र मंडल व मिठू समेत अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही.

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Author: ANAND JASWAL

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