संताली साहित्यकार भैया हांसदा ने सरकार से की मांग//

संताली भाषा के शिक्षक हों बहालसंवाददाता, दुमकासंताली साहित्यकार एवं कवि भैया हांसदा ‘चासा’ ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को एक पत्र भेज कर प्राथमिक से लेकर पीजी स्तर तक संताली शिक्षकों को बहाल किये जाने की मांग की है. श्री हांसदा द्वारा भेजे गये इस पत्र में कहा गया है कि 2003 में संताली […]

संताली भाषा के शिक्षक हों बहालसंवाददाता, दुमकासंताली साहित्यकार एवं कवि भैया हांसदा ‘चासा’ ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को एक पत्र भेज कर प्राथमिक से लेकर पीजी स्तर तक संताली शिक्षकों को बहाल किये जाने की मांग की है. श्री हांसदा द्वारा भेजे गये इस पत्र में कहा गया है कि 2003 में संताली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिया गया था. 2005 में इस भाषा को संघ लोक सेवा आयोग ने भी अपनाया. इससे पूर्व झारखंड लोक सेवा आयोग भी इस भाषा में परीक्षाएं लेती रही. श्री हांसदा ने कहा कि इस जनजातीय भाषा के विकास एवं इसके पठन-पाठन को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं किये गया है. हाल के वर्षों में इस भाषा के शिक्षक की नियुक्ति तक नहीं की गयी है. संताली भाषा के उत्थान के लिए जरूरी है कि प्राथमिक से लेकर पीजी स्तर पर संताली की पढ़ायी हो तथा इसके लिए शिक्षक बहाल किये जाएं. उन्होंने कम से कम प्रदेेश के हर कॉलेज में संताली के दो प्रोफेसर, हाई स्कूल व मिडिल स्कूल में दो-दो संताली शिक्षक तथा प्राइमरी स्कूल में एक-एक संताली शिक्षक की बहाली होनी चाहिए. श्री चासा ने कहा कि अगर संताली भाषा के शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गयी, तो आने वाली पीढ़ी इस भाषा से विमुख होती जायेगी. शिकायतकर्ताओं में प्रेमलता मरांडी, अनिता टुडू, एमेली हेंब्रम, ललिता हेंब्रम, बेरोनिका सोरेन, मर्शिला टुडू, होलिका कुमारी मरांडी, स्टेनशीला हेंब्रम, सावित्री बेसरा, सुनीता मरांडी, ललिता सोरेन सोहागिनी टुडू, सुनीता मुर्मू, सुनैना रानी मुर्मू, बाले टुडू, सुभाषिनी हेंब्रम आदि शामिल हैं.——————

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