प्रतिनिधि, दुमकाजोहार मानव संसाधन विकास केंद्र व गोटा भारोत सिदो कान्हू हूल बैसी के संयुक्त तत्वावधान में संताली साहित्य पर दो दिवसीय परिचर्चा रविवार को शुरू हुई. इसमें शांति निकेतन विवि के संताली विभागाध्यक्ष डा रतन हेंब्रम ने प्रथम सत्र में संताली लघु कथा में आदिवासी सामाजिक संस्कृतिक जीवन शैली के चित्रण विषय पर अपना व्याख्यान दिया. डॉ रतन हेंब्रम ने संताली संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को लघु कथाओं में प्रभाव से उपस्थित श्रोताओं को अवगत कराया. कार्यक्रम का संचालन एसपी कॉलेज दुमका की अंजुला मुर्मू ने किया. वहीं डा धनेश्वर मांझी ने द्वितीय सत्र में संताली लघु कथा में साहित्यिक शैली विवर्तन का विश्लेषण विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया. इस सत्र का संचालन ख्याति प्राप्त लेखक शारदा प्रसाद किस्कू ने किया. डा धनेश्वर मांझी ने संताल कहानियों में समय के अंतराल में शैली परिवर्तन के बहुत से उदाहरण प्रस्तुत किये. डा प्रमोदनी हांसदा व मेरी मारग्रेट टुडू भी इस सत्र में उपस्थित थीं. सत्र में रूपचंाद हेंब्रम लिखित हास्य कथा कला जावाय एवं पेया हाको का पाठ किया गया. होलिका कुमारी मरांडी लिखित सामाजिक समस्या पर मातालिया मातला का भी पाठ किया गया और इसके खूब ही सहारा गया. उद्घाटन सत्र में संताली लेखक शिवलाल मरांडी बेचारा, पलटन सोरेन, सुंदर, मनोज हेंब्रम, दानियल सोरेन, शारदा प्रसाद किस्कू, बोड़ो बास्की, डा सोनोत किस्कू, महेंद्र बेसरा, शिबु टुडू, होलिका कुमारी मरांडी, डा एएम सोरेन, डा संतोष बेसरा, सनातन मुर्मू, निर्मल बीके सोरेन, जुनास मरांडी, एमानुएल सोरेन, सुशांत सोरेन, एमेली हेंब्रम, मर्शिलीना, अनिल, हाबिल मुर्मू आदि उपस्थित थे……………………………….फोटो16 डीएमके जोहार 1/2परिचरचा को संबोधित करते साहित्यकार
सामाजिक जीवन में बदलाव व संताली साहित्य की भूमिका पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू
प्रतिनिधि, दुमकाजोहार मानव संसाधन विकास केंद्र व गोटा भारोत सिदो कान्हू हूल बैसी के संयुक्त तत्वावधान में संताली साहित्य पर दो दिवसीय परिचर्चा रविवार को शुरू हुई. इसमें शांति निकेतन विवि के संताली विभागाध्यक्ष डा रतन हेंब्रम ने प्रथम सत्र में संताली लघु कथा में आदिवासी सामाजिक संस्कृतिक जीवन शैली के चित्रण विषय पर अपना […]
