दुमका में 153 सहायक अध्यापकों की नौकरी पर संकट

इन सभी को चिट्ठी के माध्यम से बर्खास्तगी की सूचना दी गयी है. इसमें कहा गया है कि उनके द्वारा प्राप्त की गयी डिग्री “अवैध” संस्थानों से है.

बर्खास्तगी. विभाग ने कराया वेरिफिकेशन, अब फर्जी डिग्री बताकर हटाने की प्रक्रिया शुरू

प्रतिनिधि, दुमका

झारखंड के स्कूली शिक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई ने दुमका के 153 सहायक अध्यापकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है. इनमें से 153 शिक्षक केवल दुमका जिले से हैं. सहायक अध्यापकों को अप्रैल 2025 से वेतन बंद कर दिया गया है. इन सभी को चिट्ठी के माध्यम से बर्खास्तगी की सूचना दी गयी है. इसमें कहा गया है कि उनके द्वारा प्राप्त की गयी डिग्री “अवैध” संस्थानों से है. साल 2001-03 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्राम शिक्षा समिति के माध्यम से सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की गयी थी, जहां न्यूनतम योग्यता मैट्रिक रखी गयी थी. वर्ष 2005 में योग्यता बढ़ाकर इंटरमीडिएट कर दी गयी. लेकिन कार्यरत शिक्षकों को सरकार ने न तो अवकाश दिया और न ही यह निर्देश कि वे किस संस्थान से पढ़ाई करें. ऐसे में अधिकांश शिक्षकों ने “नॉन अटेंडिंग” संस्थानों जैसे प्रयाग महिला विद्यापीठ (उत्तर प्रदेश), हिंदी विद्यापीठ (इलाहाबाद) आदि से डिग्री प्राप्त की. शिक्षकों का कहना है कि इन डिग्रियों को विभाग ने खुद वेरिफाई किया था, वेतनमान चालू किया गया और बाद में जब 2022 में सेवा शर्त नियमावली बनी, तब पुनः इन डिग्रियों का फिजिकल वेरिफिकेशन विभागीय प्रतिनिधियों के माध्यम से संस्थानों में जाकर कराया गया. इसके बाद ही उन्हें आकलन परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली थी. शिक्षकों की मांग है कि ���रकार उनकी डिग्रियों को वैध घोषित करे.

लोन लिया, ट्रेनिंग दी गयी, फिर नौकरी पर खतरा क्यों

डिग्री वेरिफिकेशन के बाद इन शिक्षकों को इपीएफ की सुविधा, 4 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और बैंक लोन की पात्रता जैसी सुविधाएं मिली. शिक्षक इन मानकों के आधार पर बैंकों से लाखों रुपये का लोन भी ले चुके हैं. लेकिन अप्रैल 2025 में मानव संसाधन विकास विभाग के एसडी तिग्गा द्वारा सभी जिलों को भेजी गयी चिट्ठी में संस्थानों की डिग्रियां को अवैध बताया गया और उनके आधार पर शिक्षकों को बर्खास्त करने के आदेश दिये गये हैं.

एसएमसी को नहीं है बर्खास्त करने का अधिकार

शिक्षकों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि उन्हें बर्खास्त करने का आदेश स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा दिया जा रहा है, जबकि नियमानुसार यह अधिकार एसएमसी को नहीं है. शिक्षक यह भी कह रहे हैं कि बर्खास्तगी की प्रक्रिया स्पष्ट और समान नहीं है. जैसे पश्चिमी सिंहभूम जिले में सिर्फ हिंदी विद्यापीठ की डिग्रियों को अवैध माना गया है, जबकि बाकी जिलों में सभी पांच संस्थानों की डिग्री को खारिज किया गया है.

अप्रैल 2025 से विभाग ने बंद किया है वेतन

एक ओर जहां शिक्षकों को बर्खास्त किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर विभाग अभी तक उनसे रिपोर्टिंग कार्य, एमडीएम वितरण, और प्रशिक्षण जैसे काम ले रहा है. अप्रैल 2025 से सभी 153 सहायक अध्यापकों का वेतन बंद कर दिया गया है, जबकि सेवाएं अब भी जारी है. शिक्षकों का कहना है कि जब विभाग को इन संस्थानों की मान्यता की जांच करने में 20 से 25 साल लग गए, तो उनसे यह अपेक्षा कैसे की जा सकती है कि वे 2005 में ही यह जान लेते कि कौन सा संस्थान वैध है. बहरहाल इस मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष हेंब्रम ने बताया कि जिन पारा शिक्षक- शिक्षिकाओं ने अमान्य प्राप्त संस्थानों से शिक्षा ली है, उन्हीं के लिए यह निर्देश है.

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Published by: Anand jaswal

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