दुमका : तसर उत्पादन को प्रोत्साहित करने व तसर कोकून उत्पादन को जनजातीय परिवारों के द्वितीय पेशा के रूप में विकसित कर उनके आर्थिक स्वावलंबन को लेकर जिले के मसलिया प्रखंड के सात गांवों में अजरुन के पौधे लगाये जा रहे हैं. यह कार्य स्वयं सेवी संस्था फूलीन महिला चेतना विकास केंद्र मधुपुर द्वारा किया जा रहा है.
इसके लिए ले आउट व नर्सरी का कार्य पूरा हो चुका है. इसकी जानकारी देते हुए संस्था के सचिव शमशेर आलम ने बताया कि संस्था द्वारा केंद्रीय योजना मद प्रोटोटाइप फेज 6 अंतर्गत पांच वर्षीय तसर प्री कोकून योजनांतर्गत प्रखंड के कुल सात गांवों सुग्गापहाड़ी, गेनुआडीह, जामबाद, नूतुन तसरिया, मनोहर चौक, भंगाहीड़ बनकट्टा व मधुबन की तकरीबन 80 हेक्टेयर लाभुकों की जमीन पर अजरुन (कहुआ) के 180000 पौधों का रोपन कार्य किया जा रहा है. उक्त गांवों में पूर्व से ही जनजातीय परिवारों द्वारा आंशिक रूप से तसर कीट पालन कार्य किया जाना है. लेकिन पर्याप्त जानकारी पूंजी व कीट पालन योग्य वृक्षों के अभाव में उन्हें उनके परिश्रम का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है.
लेकिन इस योजना के तहत कुल 90 लाभुकों को तसर कीट पालन के लिए समूह निर्माण कर पर्याप्त प्रशिक्षण व नई तकनीक की जानकारी देकर तसर कोकून उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. ताकि उनके आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाया जा सके. उन्होंने बताया कि वृक्ष रोपन के लिए जामबाद गांव में 60000 व गेनुआडीह में 140000 अजरुन के पौधे की नर्सरी तैयार की जा चुकी है. जिसका शनिवार को परियोजना जनजाति अभिकरण दुमका को निरीक्षण दशरथ चंद्र दास द्वारा कर लिया गया है. श्री आलम ने बताया कि वर्षा शुरू होते ही पीट खुदाई के साथ-साथ पौधा रोपण कार्य प्रारंभ हो जायेगा. इस कार्यक्रम में तकनीकी सहायता के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड की बुनियादी बीज गुणन एवं प्रशिक्षण केंद्र मधुपुर से सहयोग प्राप्त किया जा रहा है. मौके पर परियोजना समन्वयक महबूब अंसारी, प्रदीप कोल, मुंशी सोरेन, दिलीप टुडू, शिवलाल हांसदा, श्याम सुंदर मुमरू आदि मौजूद थे.
