प्रणव की रिपोर्ट
रांचीः राज्य में व्यावसायिक वाहन चालकों के प्रशिक्षण और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की योजना सरकारी स्तर पर लापरवाही और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण लंबित है. लेखापरीक्षा में सामने आया कि 21 जिलों में जमीन चिह्नित किए जाने के बावजूद दो वर्ष तक अधिकांश जिलों से जमीन की उपलब्धता से संबंधित जरूरी जानकारी नहीं मिल सकी. इससे आधुनिक चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
फरवरी 2022 में मांगी गई थी जमीन की रिपोर्ट
राज्य सरकार को पात्र चालक प्रशिक्षण केंद्रों को मान्यता देने के साथ उनकी गुणवत्ता की नियमित समीक्षा और लेखापरीक्षा करनी थी. इसी क्रम में फरवरी 2022 में 10 जिलों के उपायुक्तों को स्वचालित परीक्षण पथ सहित सरकारी चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए जमीन की उपलब्धता की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था. लेकिन जुलाई और अगस्त 2024 तक केवल चार जिलों ने ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई.
लेखापरीक्षा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए बजट में 19.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. भवन निर्माण विभाग और जेएसबीसीसीएल को केंद्रों के लिए मॉडल डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया. जुलाई 2022 में मॉडल डीपीआर तैयार करने को कहा गया था, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक बजट की राशि का उपयोग नहीं हो सका. इसके कारण पूरी राशि वापस करनी पड़ी.
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अगस्त 2024 में तैयार हुआ मॉडल डीपीआर
इसके बाद जेएसबीसीसीएल ने अगस्त 2024 में प्रत्येक मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र के लिए 4.93 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला मॉडल डीपीआर प्रस्तुत किया. हालांकि, प्रशासनिक स्वीकृति देने के बजाय नवंबर 2024 में जेएसबीसीसीएल को स्वचालित परीक्षण पथ, परिवहन भवन सहित मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र और जिला चालक प्रशिक्षण केंद्र के लिए तीन अलग-अलग डीपीआर तैयार करने को कहा गया.
21 जिलों में जमीन चिह्नित, चार ने ही दी जानकारी
लेखापरीक्षा में पाया गया कि विभाग ने 21 जिलों में पहले से चिह्नित दो से 13 एकड़ तक की जमीन का इस्तेमाल करने के बजाय मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए नयी जमीन की तलाश शुरू कर दी. जमीन को लेकर विभागीय स्तर पर दोबारा प्रक्रिया शुरू होने से अनावश्यक विलंब हुआ.
दो वर्ष बाद भी केवल चार जिलों ने जमीन उपलब्ध होने की जानकारी दी. परिणामस्वरूप तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज्य में मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना नहीं हो सकी. इससे व्यावसायिक वाहन चालकों के प्रशिक्षण के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा विकसित करने की योजना प्रभावित हुई.
निर्णय बदला, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ी
लेखा परीक्षा में यह भी सामने आया कि विभाग ने मार्च 2017 में ही प्रत्येक जिले में व्यावसायिक मोटर वाहन चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया था. इन केंद्रों की स्थापना उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की निगरानी में की जानी थी. हालांकि, नवंबर 2018 में परिवहन विभाग ने पूर्व निर्णय में बदलाव करते हुए केंद्रों का निर्माण अपने पर्यवेक्षण में कराने का फैसला किया.
जून 2025 में विभाग ने बताया कि जेएसबीसीसीएल ने सभी प्रकार के प्रशिक्षण केंद्रों के लिए मास्टर प्लान, ड्राइंग और डीपीआर तैयार करने के लिए मेसर्स एसआइएसओ आर्किटेक्ट को मई 2025 में अधिकृत किया है. हालांकि, पहले से चिह्नित जमीन का इस्तेमाल नहीं होने के संबंध में विभाग की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई.
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केंद्रों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने तय किए थे मानक
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2021 में देशभर में चालक प्रशिक्षण और अनुज्ञप्ति की प्रक्रिया को मानकीकृत करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किये थे. इसके तहत तीन स्तरों पर चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनायी गई थी. चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के लिए प्रत्येक पांच करोड़ की आबादी पर एक केंद्र और 10 से 15 एकड़ जमीन की आवश्यकता निर्धारित की गई थी. क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र प्रत्येक 2.5 करोड़ की आबादी पर एक स्थापित किया जाना था. वहीं जिला चालक प्रशिक्षण केंद्र प्रत्येक जिले में एक स्थापित करने का प्रावधान था, जिसके लिए करीब दो एकड़ जमीन की जरूरत बतायी गई थी.
