धनबाद से शोभित रंजन की रिपोर्ट
Dhanbad News: झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर शनिवार को धनबाद पहुंचे. सर्किट हाउस में प्रभात खबर से खास बातचीत में कहा कि झारखंड की जनजातीय भाषाएं राज्य की पहचान हैं, लेकिन अन्य भाषाएं बोलने वाले लोगों की भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए. उन्होंने भाषा विवाद को लेकर विभागीय स्तर पर चूक की बात स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी भाषा को अनिवार्य करने से पहले यह देखा जाना चाहिए था कि वह भाषा संबंधित क्षेत्र में प्रचलित है या नहीं. साथ ही राज्य में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं की जांच और धनबाद की राजस्व व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से अपनी बातें रखी.
सवाल: धनबाद राज्य के लिए कॉमर्शियल टैक्स संग्रह का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. बीते वित्तीय वर्ष में विभाग का लक्ष्य कितना था और उसमें कितनी उपलब्धि हासिल हुई?
जवाब: धनबाद औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है, इसलिए राज्य के राजस्व में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग ने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन किया है. कर संग्रह बढ़ाने, लंबित मामलों के निष्पादन और करदाताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया गया है. बड़ी संख्या में पुराने मामलों का निपटारा भी किया गया है.
सवाल: झारखंड में भाषा विवाद को लेकर लगातार बहस चल रही है, सरकार का इस पर क्या रुख है?
जवाब: यह एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है. झारखंड की जनजातीय भाषाएं हमारी पहचान और संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान सर्वोच्च है. लेकिन राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी रहते हैं जो हिंदी, भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, बंगला या अन्य भाषाएं बोलते हैं. विशेषकर बिहार से सटे जिलों में इन भाषाओं का व्यापक प्रचलन है. इसलिए सभी भाषाई समुदायों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए.
सवाल: क्या भाषा नीति को लेकर सरकार से कोई चूक हुई है?
जवाब: सरकार की मंशा किसी भाषा या समुदाय को नुकसान पहुंचाने की नहीं रही है. हालांकि विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि जिस क्षेत्र में जो जनभाषा व्यापक रूप से बोली जाती है, उसे भी उचित महत्व मिले. किसी भाषा को अनिवार्य बनाने से पहले स्थानीय भाषाई स्थिति का व्यापक अध्ययन होना चाहिए था.
सवाल: बिहार से अलग हुए 25 साल से अधिक समय बीत चुके हैं, फिर भी भाषा को लेकर विवाद क्यों पैदा हो रहा है?
जवाब: झारखंड बनने के बाद यहां रहने वाले सभी लोग झारखंडी हैं. भाषा के आधार पर किसी की पहचान या अधिकार पर सवाल नहीं उठना चाहिए. हमारी कोशिश होनी चाहिए कि जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ अन्य प्रचलित भाषाओं को भी सम्मान मिले. समाज को जोड़ने वाली नीतियां बननी चाहिए, बांटने वाली नहीं.
सवाल: राज्य में सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं व वेतन निकासी घोटाले पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है?
जवाब: सरकार वित्तीय अनुशासन को लेकर पूरी तरह गंभीर है. पहले बोकारो और फिर हजारीबाग में अतिरिक्त निकासी और वेतन भुगतान से जुड़े मामलों की जांच के दौरान अधिकारियों की टीम ने मौके पर जाकर समीक्षा की. जांच आगे बढ़ने पर अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों की जानकारी सामने आई है. दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है. पूरे मामले की जांच वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में कराई जा रही है.
सवाल: राजस्व बढ़ाने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है?
जवाब: डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन कर प्रणाली, नियमित ऑडिट और जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. धनबाद में उद्योग, खनन और व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिससे कि राजस्व बढ़े और किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की संभावना कम हो.
सवाल: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी क्या प्रत्याशी देगी ?
जवाब: झारखंड में आप सिर्फ कांग्रेस नहीं महागठबंधन को लेकर सोचें. चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का निर्णय हमें मान्य होगा. झामुमो, कांग्रेस, राजद सहित अन्य पार्टियां मिलकर चुनाव में भाग लेंगी.
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