रांची में करीब 11 दिनों की पूछताछ के बाद सोमवार को तीनों हार्डकोर नक्सलियों को वापस धनबाद लाया गया. इसमें भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल, 15 लाख रु के इनामी मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण और गौरव उर्फ वीरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ शामिल हैं. अब धनबाद पुलिस तीनों से अपने स्तर पर पूछताछ करेगी.
रांची में कई एजेंसियों ने खंगाली कुंडली
31 जुलाई को रिमांड मिलने के बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच रांची ले जाया गया था. रांची में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) और झारखंड पुलिस के विभिन्न थाना व जांच अधिकारियों ने तीनों से अलग-अलग पूछताछ की. एजेंसियों ने उनके बयानों का मिलान करते हुए माओवादी संगठन के नेटवर्क, फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति और सहयोगियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की.
धनबाद पुलिस की पूछताछ में भी खुलेंगे कई राज
धनबाद लौटने के बाद पुलिस का फोकस तीनों से स्थानीय नेटवर्क और जिले में उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने पर रहेगा. पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि धनबाद में उनके संपर्क किन लोगों से थे, उन्हें कौन मदद पहुंचाता था और संगठन के लिए स्थानीय स्तर पर किस तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं.
कई राज्यों में नेटवर्क की तलाश
जांच एजेंसियों की पूछताछ में झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है. हथियारों की आपूर्ति, आर्थिक स्रोत, नये कैडरों की भर्ती और सुरक्षित ठिकानों के संबंध में भी जानकारी जुटायी गयी है.
28 जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि तीनों को 28 जुलाई की रात बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था. रिमांड अवधि में पूछताछ के बाद अब उन्हें धनबाद लाया गया है. पुलिस को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर पूछताछ से नक्सली नेटवर्क से जुड़े कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं.
