एसएनएमएमसीएच धनबाद में लंबे समय से अनुबंध पर कार्यरत 16 कर्मियों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद जगी है. समान काम के लिए समान वेतन, सेवा के समायोजन, नियमित नियुक्ति अथवा नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने संबंधित प्राधिकारी को शिकायत पर नियमानुसार विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है. 20 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका का निष्पादन कर दिया.
नियमित कर्मचारियों के समान वेतन की मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे 10 वर्षों से अधिक समय से एसएनएमएमसीएच में लगातार निर्धारित मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें नियमित चतुर्थवर्गीय सरकारी कर्मचारियों के समान न्यूनतम वेतन का लाभ नहीं मिल रहा है. कर्मियों ने समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत के आधार पर न्यूनतम वेतन देने की मांग की है.
नियमितीकरण समेत अन्य लाभ की मांग
कर्मियों ने अपनी सेवाओं के समायोजन, नियमित नियुक्ति अथवा नियमितीकरण और उससे जुड़े अन्य सेवा लाभ देने की भी मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में सेवा देने के बावजूद उनकी सेवा संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है. साथ ही नियमित कर्मियों के अनुरूप वेतन और सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं.
अधीक्षक के समक्ष नया प्रतिनिधित्व देने का निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने संबंधित विभाग के समक्ष नया प्रतिनिधित्व दाखिल करने की अनुमति मांगी. राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत और मांगों को लेकर एसएनएमएमसीएच के अधीक्षक के समक्ष संपर्क कर सकते हैं. इसके बाद अदालत ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अस्पताल अधीक्षक के समक्ष नया प्रतिनिधित्व दाखिल करने का निर्देश दिया.
आठ सप्ताह में करना होगा निर्णय
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिनिधित्व प्राप्त होने के बाद अधीक्षक संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर कानून, नियम और विनियम के अनुरूप आठ सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करें. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्णय याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आता है, तो उसके आधार पर आवश्यक परिणामी आदेश अगले चार सप्ताह के भीतर जारी किये जाएं. हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद लंबे समय से वेतन और सेवा संबंधी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे 16 अनुबंध कर्मियों को अपने मामले के निस्तारण की उम्मीद जगी है.
