आइआइटी आइएसएम धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग स्थित ईआइएसीपी केंद्र की ओर से बोकारो के पिंड्राजोरा में सिक्की कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. झारखंड फाउंडेशन केंद्र के सहयोग से आयोजित ‘सतत आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सिक्की कला’ विषयक क्षमता निर्माण कार्यक्रम चार सितंबर तक चलेगा. इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों और गृहिणियों समेत 30 प्रतिभागी शामिल हैं.
पारंपरिक कला से रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
ईआइएसीपी केंद्र के समन्वयक सह विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक सिन्हा ने कहा कि पारंपरिक कौशल को मजबूत करने से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ टिकाऊ आजीविका के अवसर भी पैदा किये जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को आइआइटी आइएसएम में आयोजित होने वाले संस्थागत कार्यक्रमों में अपने सिक्की उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने का अवसर दिया जाएगा.
पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल
प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने पारंपरिक आजीविका को पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया. झारखंड फाउंडेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयदेव महतो ने सिक्की कला के जरिये रोजगार सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला.
उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को किया जाएगा सम्मानित
प्रशिक्षण विशेषज्ञ नाजदा खातून और मो. जसीम प्रतिभागियों को सिक्की कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं. डॉ. अवंतिका चंद्रा ने प्रतिभागियों को मिशन लाइफ की शपथ दिलायी. कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन प्रशिक्षुओं को सम्मानित किया जाएगा.
