चिरकुंडा/ मुगमा. कंचनडीह (निरसा) में वीरेन्द्र राय एवं परिवार के सौजन्य से आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तृतीय दिवस शनिवार को प्रभु श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया. कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंडाल के बाहर खड़े होकर भी कथा का श्रवण किया. राम जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि, भजनों और भक्तों के उत्साह से गुंजायमान हो उठा.
कथा व्यास परम पूज्य राजन जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि शिव भक्ति के बिना राम भक्ति नहीं और राम भक्ति के बिना शिव भक्ति नहीं. भगवान शिव स्वयं श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और श्रीराम भगवान शिव के आराध्य हैं. दोनों की उपासना एक-दूसरे की पूरक है.
महाराज श्री ने कहा कि श्रीराम की कथा अनंत और अपरंपार है. इसे सुनना, सुनाना और समझना भी केवल प्रभु श्रीराम की कृपा से ही संभव है. मां पार्वती एवं शिव की के संवाद को महाराज जी ने विस्तार से बताते हुए कहा कि मैया ने श्री राम जी के कथा को पूरी श्रद्धा से सुना.
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा, "विवाद नहीं, संवाद की संस्कृति अपनाइए। संवाद से ही शंकाओं का समाधान होता है और जीवन के भ्रम दूर होते हैं." उन्होंने कहा कि जिस कान ने भगवान की कथा नहीं सुनी, वह सर्प के बिल के समान है; जो हृदय कथा सुनकर भी द्रवित न हो, वह पत्थर के समान है; और जिस जिह्वा पर प्रभु का नाम न आए, उसका जीवन व्यर्थ है. सज्जनता और विनम्रता ही ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है.
महाराज श्री ने आगे कहा कि मनुष्य अपनी उपलब्धियों को अपना पुरुषार्थ मानकर मोह में पड़ जाता है, जबकि सब कुछ ईश्वर की लीला है. जब जीवन में कष्ट आएँ, तब भी उन्हें प्रभु की कृपा और उनकी लीला मानकर स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि भगवान अपनी विशेष लीला अपने विश्वासपात्र भक्तों के साथ ही करते हैं. कथा के दौरान महाराज श्री ने रावण के पूर्व जन्म, भगवान ब्रह्मा एवं भगवान शिव की कठोर तपस्या तथा श्रीरामावतार की पृष्ठभूमि का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया. इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया.
महाराज श्री के भजनों से पूरा पंडाल झूमता रहा और भक्ति भाव में लोग डूबे रहे प्रभु श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग आते ही कथा पंडाल उत्सव में बदल गया. भगवान श्रीराम के जन्म की घोषणा होते ही शंखनाद और जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर प्रभु का स्वागत किया.
महिलाओं ने मंगलगीत गाए, भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल "जय श्रीराम " के उद्घोष से गुंजायमान हो गया. अनेक श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और आनंद से नम हो गईं तथा उपस्थित जनसमूह ने जन्मोत्सव को दिव्य आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया.
कथा में कंचनडीह, निरसा, धनबाद, बोकारो सहित झारखंड के विभिन्न जिलों तथा देश के अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया. कथा स्थल पर इतनी अधिक भीड़ उमड़ी कि पंडाल में स्थान कम पड़ गया और अनेक श्रद्धालुओं ने बाहर खड़े होकर कथा का श्रवण किया. कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर नृत्य करते रहे.
अंत में आयोजक वीरेन्द्र राय एवं परिवार ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं ग्रामवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी कथा प्रसंगों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया. रामकथा में वोलेंटियर (स्वयंसेवक) के रूप में शशि भूषण तिवारी, मुखिया संजय महतो,जावेद अंसारी, इम्तियाज खान,रमेश सिंह, बीरेंद्र राजभर,संदीप सिंह,सुजीत कुमार,रौशन कुमार,भुमि पांडेय, खुशी कुमारी, पूजा कुमारी महतो, प्रिती कुमारी महतो, रितिका कुमारी , किरण कुमारी व अन्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
