बीसीसीएल के लिए प्रस्तावित मेगा कोल प्रोजेक्ट ब्लॉक-ई आने वाले वर्षों में संजीवनी साबित हो सकता है. परियोजना के धरातल पर उतरने से कंपनी के कोयला उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी होने के साथ आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन और पचगढ़ी क्षेत्र के आने की बात कही जा रही है. ऐसे में रेल लाइन, बस्तियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति महत्वपूर्ण होगी. जमीन अधिग्रहण के साथ बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने की आशंका है.
छाताबाद समेत कई इलाकों पर असर संभव
आकाशकिनारी से खास कुसुंडा तक फैले इस मेगा प्रोजेक्ट में बीसीसीएल की करीब नौ कोलियरियों को शामिल किया गया है. शुक्रवार को कोयला भवन में परियोजना को लेकर बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई.
इसमें परियोजना की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की गयी. परियोजना को कोल इंडिया बोर्ड से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. 26 मार्च 2024 को कोल इंडिया बोर्ड की 463वीं बैठक में इसे स्वीकृति दी गयी थी.
परियोजना की अनुमानित लागत 5850.83 करोड़ रु है. करीब 550 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की उम्मीद है. इसमें रैयती और गैर-रैयती जमीन शामिल है. जमीन अधिग्रहण के साथ बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने की आशंका है.
बीसीसीएल के उत्पादन को मिलेगी बड़ी रफ्तार
ब्लॉक-इ शुरू होने से बीसीसीएल के कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है. परियोजना क्षेत्र में करीब 380 मिलियन टन कोयला रिजर्व होने की बात कही गयी है. योजना के अनुसार, 2027 से उत्पादन शुरू करने की तैयारी है.
अगले 27 वर्षों तक दो चरणों में कोयला उत्पादन किया जायेगा. पहला चरण 16 साल और दूसरा 11 साल का होगा. प्रत्येक वर्ष करीब 150 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट ?
देश में कोकिंग कोल की बढ़ती मांग के बीच ब्लॉक-ई को बीसीसीएल के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. भारत अपनी जरूरत का कोकिंग कोल अभी भी बड़ी मात्रा में आयात करता है. ऐसे में घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाने में बीसीसीएल की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है.
बड़ा सवाल : कैसे होगा पुनर्वास ?
परियोजना के आगे बढ़ने के साथ सबसे बड़ा सवाल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन का होगा. लोगों को कहां और किस तरह बसाया जायेगा, मुआवजा और नियोजन किस आधार पर मिलेगा तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार में कितनी प्राथमिकता दी जायेगी- इन सवालों का जवाब परियोजना की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगा.
नौ कोलियरियों को मिलाकर बनेगा ब्लॉक-इ
ब्लॉक-इ में करीब नौ कोलियरियों को शामिल किया गया है. इनमें आकाशकिनारी, अमलगमेटेड केशलपुर वेस्ट, पचगढ़ी, सिजुआ, मोदीडीह, सेंद्रा, निचितपुर, ईस्ट बसुरिया और खास कुसुंडा क्षेत्र शामिल हैं. इस कारण कतरास, सिजुआ और कुसुंडा क्षेत्र का भविष्य सीधे इस मेगा परियोजना से जुड़ गया है.
डीसी रेल लाइन के भविष्य पर भी टिकी नजर
रेलवे ट्रैक के स्थानांतरण, डायवर्सन या अन्य तकनीकी विकल्प को लेकर आगे निर्णय महत्वपूर्ण होगा. पचगढ़ी क्षेत्र के भी परियोजना से प्रभावित होने की संभावना है. जोड़िया और डायवर्सन से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट डीजीएमएस के निर्देश पर आइआइटी आइएसएम की ओर से पांच अगस्त 2025 को जमा किये जाने की जानकारी है.
हालांकि, परियोजना के कारण डीसी लाइन और पचगढ़ी क्षेत्र में किस स्तर तक बदलाव होगा, इसकी अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है. बीसीसीएल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और संबंधित एजेंसियों की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति साफ होगी.
रोजगार के भी खुलेंगे नये रास्ते
ब्लॉक-इ के धरातल पर उतरने से कोयला उत्पादन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है. परियोजना के निर्माण, जमीन अधिग्रहण, खनन, परिवहन, मशीनरी संचालन, सुरक्षा और अन्य सहायक गतिविधियों में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
वहीं, ट्रांसपोर्ट, वर्कशॉप, सप्लाइ, छोटे कारोबार और सेवा क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ सकता है. स्थानीय युवाओं के लिए यह परियोजना रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकती है. हालांकि, इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार में प्राथमिकता देने की नीति महत्वपूर्ण होगी.
