धनबाद. डाक विभाग ने डाक जीवन बीमा (पीएलआइ) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआइ) की बिक्री बढ़ाने के लिए इंसेंटिव की नयी व्यवस्था लागू की है. इसके तहत पॉलिसी बेचने वाले एजेंटों और सेल्स फोर्स को नयी पॉलिसी कराने पर पहले की तुलना में अधिक प्रोत्साहन मिलेगा. पीएलआइ की लंबी अवधि वाली पॉलिसियों में पहले वर्ष के प्रीमियम के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोक्योरमेंट इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है.
छह साल पुराने इंसेंटिव ढांचे में संशोधन
नयी व्यवस्था के तहत पीएलआइ में रिन्यूअल प्रीमियम पर सभी श्रेणी की सेल्स फोर्स को एक प्रतिशत इंसेंटिव मिलेगा. वहीं, आरपीएलआइ में रिन्यूअल प्रीमियम पर 2.5 प्रतिशत इंसेंटिव निर्धारित किया गया है. विभाग ने यह बदलाव 19 जून 2020 से लागू पुराने इंसेंटिव ढांचे में संशोधन के बाद किया है.
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नयी व्यवस्था में प्रोक्योरमेंट यानी नयी पॉलिसी कराने पर मिलने वाले प्रोत्साहन को पॉलिसी की अवधि और योजना के अनुसार अलग-अलग रखा गया है.
पीएलआइ में अवधि के अनुसार इंसेंटिव
पीएलआइ की चिल्ड्रेन पॉलिसी और युगल सुरक्षा जैसी योजनाओं में 15 वर्ष तक की प्रीमियम अवधि वाली पॉलिसी पर पहले वर्ष के प्रीमियम का चार प्रतिशत इंसेंटिव मिलेगा. 15 से 25 वर्ष तक की अवधि वाली पॉलिसी पर यह दर 10 प्रतिशत होगी. वहीं, 25 वर्ष से अधिक अवधि वाली पॉलिसी पर पहले वर्ष के प्रीमियम का 20 प्रतिशत प्रोक्योरमेंट इंसेंटिव निर्धारित किया गया है.
एईए पॉलिसी में 15 वर्ष तक की अवधि के लिए पांच प्रतिशत और 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए सात प्रतिशत इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है.
आरपीएलआइ की सभी पॉलिसियों पर 10% इंसेंटिव
ग्रामीण डाक जीवन बीमा में इंसेंटिव की व्यवस्था अपेक्षाकृत समान रखी गयी है. सभी प्रकार की आरपीएलआइ पॉलिसियों पर सभी श्रेणी के एजेंटों और सेल्स फोर्स को प्रोक्योरमेंट प्रीमियम का 10 प्रतिशत इंसेंटिव मिलेगा. इसके अलावा रिन्यूअल प्रीमियम पर 2.5 प्रतिशत इंसेंटिव का प्रावधान है.
बिक्री बढ़ाने के साथ प्रीमियम भुगतान पर भी जोर
डाक विभाग को उम्मीद है कि नयी इंसेंटिव व्यवस्था से एजेंटों और सेल्स फोर्स को लंबी अवधि वाली बीमा पॉलिसियां बेचने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इससे पीएलआइ और आरपीएलआइ की नयी पॉलिसियों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
विभाग की ओर से यह भी माना जा रहा है कि इंसेंटिव व्यवस्था में बदलाव के बाद एजेंट पॉलिसीधारकों से नियमित प्रीमियम भुगतान के लिए बेहतर फॉलो-अप कर सकेंगे. इससे नयी पॉलिसियों की बिक्री के साथ मौजूदा पॉलिसियों के नवीनीकरण और प्रीमियम संग्रह पर भी असर पड़ सकता है.
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