डाक विभाग ने शाखा डाकघरों के कामकाज को पूरी तरह कागजरहित (पेपरलेस) बनाने की दिशा में पहल तेज कर दी है. सूचना प्रौद्योगिकी 2.0 लागू होने के बाद भी शाखा डाकघरों में कई तरह के मैनुअल रिकॉर्ड, रजिस्टर और पुस्तकों का रखरखाव किया जा रहा है.
विभाग ने अब इन कागजी व्यवस्था को समाप्त करने के संभावित तरीकों पर सभी डाक परिमंडलों से आगामी 25 अगस्त तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं.
शाखा डाकघरों में लागू हो चुका है आईटी 2.0
विभाग के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी 2.0 को शाखा डाकघरों, उप डाकघरों और प्रधान डाकघरों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है. शाखा डाकघरों में अब हाथ में लेकर संचालित किये जाने वाले उपकरण और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध हैं. इसके जरिये लेनदेन का वास्तविक समय में प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आंकड़ों का आदान-प्रदान संभव हो रहा है.
कागजी रिकॉर्ड से बढ़ रहा काम का बोझ
विभाग का कहना है कि पूर्ण कंप्यूटरीकरण के बावजूद शाखा डाकघरों में पुराने मैनुअल रिकॉर्ड और रजिस्टर जारी हैं. इससे एक ही काम को कागज और डिजिटल दोनों माध्यमों में करने की स्थिति बन रही है. फलत: ग्रामीण डाक सेवकों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है, स्टेशनरी की खपत बढ़ रही है और कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है.
पेपरलेस व्यवस्था के लिए समिति गठित
शाखा डाकघरों को पेपरलेस करने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए विभाग ने 16 जुलाई 2026 को समिति गठित की थी. समिति ने मैनुअल रिकॉर्ड और रजिस्टरों को समाप्त कर डिजिटल व्यवस्था लागू करने के संभावित तरीकों से संबंधित रिपोर्ट और प्रस्ताव तैयार किया है.
अब विभाग इस प्रस्ताव पर आगामी 25 अगस्त तक सभी डाक परिमंडलों की राय लेना चाहता है. विभाग ने सभी क्षेत्रीय प्रमुखों से रिपोर्ट में निर्दिष्ट तरीकों का अध्ययन कर अपनी टिप्पणियां और सुझाव भेजने को कहा है. इसीी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
