महेशपुर भूमिगत खदान के ऊपर ओबीआर का पहाड़, पिलरों पर दबाव का आरोप; एटक ने मांगी तकनीकी जांच

बीसीसीएल गोविंदपुर क्षेत्र संख्या तीन की महेशपुर कोलियरी में संचालित आउटसोर्सिंग परियोजना से निकलने वाले ओबीआर को भूमिगत खदान के ऊपर लगातार डंप किये जाने का आरोप है.

धनबाद. बीसीसीएल गोविंदपुर क्षेत्र संख्या तीन की महेशपुर कोलियरी में संचालित आउटसोर्सिंग परियोजना से निकलने वाले ओबीआर को भूमिगत खदान के ऊपर लगातार डंप किये जाने का आरोप है. मजदूरों और यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, लंबे समय से जमा ओबीआर अब विशाल पहाड़ का आकार ले चुका है. इससे भूमिगत खदान के होलेज और उत्पादन मार्ग के ऊपर स्थित पिलरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है.

मजदूरों का कहना है कि पहले से जमा ओबीआर के ढेर पर लगातार नया मलबा डाला जा रहा है. इससे जमीन के नीचे स्थित होलेज व उत्पादन मार्ग पर दबाव बढ़ रहा है. महेशपुर भूमिगत खदान में पहले से ही डिपिलरिंग का काम चल रहा है और वर्तमान में यहां बेहतर उत्पादन हो रहा है. ऐसे में खदान के ऊपर लगातार बढ़ रहे ओबीआर के भार को मजदूर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मान रहे हैं.

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पांच लाख टन से अधिक ओबीआर जमा होने का दावा

मजदूरों के अनुसार, भूमिगत खदान के ऊपर करीब पांच लाख टन से अधिक ओबीआर जमा हो चुका है. महेशपुर कोलियरी में करीब 360 मैनपावर कार्यरत हैं. पिलरों पर बढ़ते संभावित भार को लेकर कर्मियों में चिंता और आक्रोश है.

मजदूरों का कहना है कि मामला सीधे खदान की सुरक्षा से जुड़ा है. इसके बावजूद ओबीआर डंपिंग जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है. उनका कहना है कि समय रहते डंपिंग पर रोक नहीं लगायी गयी और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है.

एटक ने जीएम को सौंपा पत्र

मामले को लेकर एटक महेशपुर शाखा के सचिव रामचंद्र साव ने गोविंदपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक को पत्र सौंपकर ओबीआर डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने और तकनीकी जांच कराने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि महेशपुर आउटसोर्सिंग पैच से ओबीआर लाकर भूमिगत खदान की होलेज मेन लाइन के ऊपर और आसपास लगातार डंप किया जा रहा है.

रामचंद्र साव ने कहा कि भूमिगत खदान में डिपिलरिंग का काम चल रहा है और कई स्थानों पर जमीन धंसने की स्थिति भी सामने आयी है. ऐसी परिस्थिति में खदान के ऊपर भारी मात्रा में ओबीआर जमा करना सुरक्षित नहीं है. उन्होंने प्रबंधन से तत्काल तकनीकी जांच कराकर खदान की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की.

जमीन विवाद से ओबीआर निस्तारण में परेशानी

बताया जाता है कि महेशपुर कोलियरी की आउटसोर्सिंग परियोजना के सामने रैयती जमीन से जुड़ा विवाद भी है. वहीं बत्तीघर, टुंडू स्टेशन, नदी किनारे, सिनीडीह 75 क्वार्टर, राजधानी क्वार्टर, सिनीडीह क्वार्टर और सुरेंद्र मार्केट समेत कई स्थानों पर बसे लोगों और झोपड़ियों को हटाने को लेकर भी विवाद की स्थिति है.

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मजदूरों के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण आउटसोर्सिंग से निकलने वाले ओबीआर के सुरक्षित निस्तारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है. इसी वजह से खदान के ऊपर ओबीआर डंप किये जाने का आरोप लगाया जा रहा है.

मजदूरों और यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन से ओबीआर के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था करने तथा भूमिगत खदान के पिलरों पर पड़ रहे संभावित दबाव की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि उत्पादन से अधिक महत्वपूर्ण मजदूरों की सुरक्षा है.

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By Ajay prasad

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