धनबाद. सिंदूरपुर लाल मैदान में रविवार को झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति की बैठक हुई. अध्यक्षता खगेन रजक ने की. बैठक में झारखंड में बांग्ला भाषा के विकास, संरक्षण और इसके अधिकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी. समिति के सदस्यों ने भाषा के हित में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया.
बांग्ला भाषा के अधिकार का उठाया मुद्दा
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी राज्य में बांग्ला भाषा को उसका उचित अधिकार नहीं मिल पाया है. उनका कहना था कि बांग्ला भाषा के विकास और संरक्षण के लिए गंभीर पहल की जरूरत है. इसके लिए समाज के लोगों को संगठित होकर प्रयास करने की आवश्यकता है.
वक्ताओं ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार होती है. इसलिए बांग्ला भाषा के संरक्षण और इसके अधिकार से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की जरूरत है.
संगठित प्रयास पर दिया जोर
समिति के सदस्यों ने कहा कि भाषा से जुड़े अधिकारों और विकास के लिए केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है. बैठक में बांग्ला भाषा के प्रति लोगों को जागरूक करने और अधिक से अधिक लोगों को समिति से जोड़ने पर भी चर्चा हुई.
आगे की रणनीति पर किया विचार-विमर्श
बैठक के दौरान समिति की ओर से आने वाले दिनों में किये जाने वाले कार्यक्रमों और आंदोलन की रणनीति पर मंत्रणा की गयी. सदस्यों ने बांग्ला भाषा के विकास और अधिकार को लेकर संगठनात्मक स्तर पर प्रयास तेज करने पर सहमति जतायी.
बैठक में समिति के संस्थापक बेंगू ठाकुर के अलावा चाईना पांडेय, रीता, पूजा देवी, कमला देवी, तपन रजक, भवेष रजक, गीता देवी, लक्ष्मी देवी, यीशु देवी और आशा देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
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