नवोदय विद्यालय मामले में बच्चों को राहत, निलंबन वापस करने का आदेश

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झारखंड उच्च न्यायालय में जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों के भविष्य से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई. हाल के दिनों में इस विद्यालय में अध्ययनरत एक छात्र की मौत तालाब में डूबने से हो गई थी. घटना गोविन्दपुर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में घटी थी. जिसमें हजारीबाघ निवासी आयुष टोप्पो नामक छात्र की मौत हो गई थी. वह वर्ग नवम का छात्र था. इधर हाल के दिनों में गोविंदपुर थाना क्षेत्र के नगरक्यारी निवासी सुमीत कुमार दास नामक छात्र के साथ रैगिंग का मामला प्रकाश में आया था. हालांकि पुलिस ने इसे लेनदेन एवं आपसी मारपीट का मामला बताया था. घटना को लेकर विद्यालय में हो हंगामा से लेकर तोड़ फोड़ तक हुई थी. इन मामलों में अन्य छात्रों पर विद्यालय प्रबंधन ने विभागीय कार्रवाई भी किया था.

उच्च न्यायालय ने दिया आदेश

अदालत ने छात्रों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी छात्र को जबरन ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, माननीय अदालत ने इस पूरे मामले को लेकर नवोदय विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि प्रभावित छात्रों को स्कूल में दोबारा री-एडमिट किया जाए. अदालत ने नवोदय विद्यालय प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए हैं कि छात्रों को शिक्षा जारी रखने के लिए सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं और संसाधन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाए. चूंकि छात्र हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए उनकी शिक्षा की निरंतरता को बिना किसी बाधा के हिंदी भाषा में ही पूरा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. धनबाद निवासी एडवोकेट प्रिया साव ने मजबूती से रखा पक्षपूरक वाद सूची सप्लीमेंट्री कोजलिस्ट ) के अनुसार, यह मामला डब्ल्यूपी (सी) 5602/2026 (मास्टर आर्यन मंडल बनाम भारत संघ व अन्य) के रूप में दर्ज है. कोर्ट में याचिकाकर्ताओं (नाबालिग छात्रों) की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय की अधिवक्ता प्रिया साव ने पैरवी की. उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि बीच सत्र में छात्रों को जबरन स्कूल से बाहर करना या टीसी थमाना उनके शिक्षा के मौलिक अधिकार का हनन है. उन्होंने मांग किया कि हिंदी माध्यम के इन छात्रों को बिना किसी भेदभाव के स्कूल में पढ़ाई पूरी करने की अनुमति और सुविधाएं दी जाएं. अदालत ने एडवोकेट प्रिया साव की दलीलों को स्वीकार करते हुए छात्रों के पक्ष में यह अंतरिम राहत प्रदान की है. जिससे कई गरीब और मेधावी छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो गया है.

बच्चों की ओर से दायर किया गया था याचिका

इस मामले में पीड़ित छात्र मास्टर आर्यन मंडल, मास्टर कुंदन कृष्णन, मास्टर लकी कुमार, मास्टर आलोक मोदक, मास्टर प्रेम कुमार कुमहार, मास्टर चेतन राजभर, मास्टर उदय कुमार रजक के द्वारा टीसी देने के मामले में अधिवक्ता प्रिया साव बच्चों की ओर से पक्ष रख रही थी. इस मामले में इन बच्चों के बनाम यूनियन ऑफ इंडिया द सेक्रेट्री मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन डिपार्टमेंट ऑफ़ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी के माध्यम से विषय को रखा गया था.

क्या कहते हैं विद्यालय प्रबंधन

इस संबंध में प्रभारी प्राचार्य चंद्र कांत यादव ने कहा कि जिस समय आयुष टोप्पो की तालाब में डूबने से मौत हुई थी उसे समय मैं प्राचार्य नहीं था. जिन बच्चों को निलंबित किया गया था. टीसी देने का मामला विद्यालय प्रबंधन के पास नहीं है. माननीय उच्च न्यायालय का आदेश की जानकारी तत्काल नहीं है.


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By Prabhat khabar news desk

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