छाताबाद में हुए भू-धंसान को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अब भी भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. दर्जनों घरों में दरारें पड़ने और कई मकानों के जमींदोज होने के बाद क्षेत्र से लोगों का पलायन लगातार जारी है. वहीं बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य भी जारी रखा गया है.
50 से अधिक घरों के लोग कर चुके हैं पलायन
भू-धंसान की घटना के बाद क्षेत्र के दर्जनाधिक घर पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि कई अन्य मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयी हैं. स्थिति को देखते हुए आसपास के 50 से अधिक घरों के लोग अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं. प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे अब भी भय के साये में जी रहे हैं.
रेस्क्यू टीम मलबे से निकाल रही सामान
गोविंदपुर एरिया की ओर से राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है. भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में रेस्क्यू टीम मलबे और जमीन में दबे घरेलू सामानों को निकालने में जुटी हुई है. गोविंदपुर एरिया-3 के महाप्रबंधक सत्यकाम आनंद ने बताया कि रेस्क्यू अभियान में अब तक कई परिवारों के उपयोगी सामान सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है.
राहत शिविर में दी जा रही भोजन की सुविधा
प्रभावित परिवारों के लिए क्षेत्र में राहत शिविर संचालित किया जा रहा है. शिविर में लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं.
प्रबंधन के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश
भू-धंसान की घटना के बाद स्थानीय लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन के प्रति नाराजगी भी बढ़ती जा रही है. प्रभावित परिवारों का आरोप है कि लंबे समय से क्षेत्र में खतरे की आशंका बनी हुई थी, लेकिन समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाये गये.
आउटसोर्सिंग कार्य बंद कर धरने पर बैठे ग्रामीण
भू-धंसान के विरोध में ग्रामीणों ने ईस्ट कतरास आउटसोर्सिंग परियोजना का काम बंद करा दिया है. ग्रामीण धरना पर बैठ गये हैं, जिससे कंपनी का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है. प्रदर्शनकारी सुरक्षा, पुनर्वास और मुआवजा समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य जारी रहने के बावजूद लोगों के मन से भय अभी दूर नहीं हुआ है. प्रभावित परिवार सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
