Dhanbad News : कल खरमास होगा समाप्त, शुरू होंगे शुभ कार्य

Dhanbad News : बैसाखी आज, सतुआन कल व जुड़ शीतल व पोयला बोइशाख 15 को

Dhanbad News : 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करेंगे. यह सूर्य की मेष संक्रांति होगी. इसी के साथ सौर कैलेंडर का नया वर्ष शुरू हो जायेगा. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोग अपनी-अपनी संस्कृति के अनुसार मेष संक्रांति के मौके पर सतुआन, बैसाखी, पोयला बोइशाख, जुड़ शीतल आदि त्योहार मनाते हैं.

पंडित गुणानंद झा ने बताया कि हिंदू पंचांग में कुल 12 राशियां होती है. इसी के अनुसार 12 संक्रांति होती हैं. संक्रांति से ही नये माह का प्रारंभ माना जाता है. मान्यता है कि सूर्य की संक्रांति पर नदियों में स्नान और दान करने से पुण्य प्राप्त होता है. इसी दिन से खरमास भी समाप्त हो जायेगा और विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश, भूमि पूजन आदि अनुष्ठान किये जा सकेंगे.

फसल की कटाई शुरू होने का उत्सव बैशाखी आज

13 अप्रैल को बैसाखी है. बैसाखी परंपरागत रूप से सिख नव वर्ष है. पंजाब, हरियाणा के साथ पूरे देश में रहनेवाले सिख समुदाय बैसाखी मनाते हैं. इस दिन रबी की फसल की कटाई शुरू होने पर यह उत्सव मनाया जाता है. इस दिन गेहूं, तिलहन, गन्ने आदि की फसल की कटाई शुरू होती है. इस अवसर पर किसान उपजी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देते हैं. साथ ही भविष्य की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना करते हैं. इस दिन गुरुद्वारा व मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. लोग सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से लंगर भी करते हैं. इसके अलावा भांगड़ा और गिद्दा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के जरिये खुशी का इजहार करते हैं. पर्व को लेकर केंद्रीय गुरुद्वारा में तैयारी की गयी है. रविवार की अहले सुबह से बंदे गुरुद्वारा पहुंच कर गुरुग्रंथ साहेब के आगे मत्था टेकर सुख-समृद्धि के लिए वाहे गुरु से अरदास लगायेंगे.

सतुआन: नयी फसल के घर पहुंचने का उल्लास

14 अप्रैल को सतुआन है. उत्तर भारत में विशेष कर बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल में मेष संक्रांति पर सतुआन पर्व मनाया जाता है. सूर्य के पूरी तरह से उत्तरायण होने और नयी फसल के घर पहुंच जाने की खुशी में यह लोकपर्व मनाया जाता है. लोग इस दिन स्नान-ध्यान कर भगवान की पूजा करते हैं. साथ ही मिट्टी का घड़ा खरीद कर उसमें पानी रखते हैं. चना व जौ का सत्तू, गुड़, कच्चे आम, खीरा, ककड़ी आदि फल भगवान को अर्पित करते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. ऐसी मान्यता है कि मेष संक्रांति से गर्मी और बढ़ जाती है. इस मौसम में सत्तू, आम, खीरा, ककड़ी जैसे फलों का सेवन करने से गर्मी का असर कम होता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होती है. वहीं, घड़े का ठंडा पानी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है.

जुड़ शीतल : बड़े-बुजुर्ग बच्चों के सिर पर ठंडा पानी रख दे���े हैं आशीर्वाद

बिहार के मिथिलांचल का लोकपर्व जुड़ शीतल 15 अप्रैल को मनाया जायेगा. हर वर्ष इस पर्व की शुरुआत एक दिन पहले यानी सतुआन के दिन से ही हो जाती है. इसी दिन मिट्टी के घड़े खरीदे जाते हैं और उनमें पीने का पानी भरा जाता है. सतुआन की रात को ही कढ़ी-चावल बनाया जाता है, जिसे अगले दिन यानी जुड़ शीतल के दिन भोग लगा कर खाया जाता है. इस दिन मिथिलांचल के लोग घरों में चूल्हे नहीं जलाते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन से मिट्टी के कलश से ठंडा पानी पीने की शुरुआत होती है. जबकि, बासी भोजन खाने का अंतिम दिन है. सुबह बड़े-बुजुर्ग घर के सभी बच्चों के सिर पर बासी ठंडा पानी डालकर ‘जुड़े रहो’ का आशीर्वाद देते हैं.

बंगला नव वर्ष को लेकर नवविवाहिताओं में उत्साह

मेष संक्रांति से बंग समुदाय का नया साल शुरू होता है. इसे पोयला बोइशाख कहा जाता है. नवविवाहित जोड़ों इस पर्व को लेकर खासे उत्साहित हैं. इस दिन लोग नये कपड़े पहन कर देवी मां की पूजा करेंगे. इसके बाद बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेंगे और एक दूसरे को ”शुभो नववर्ष” कह कर दिन की शुरुआत करेंगे. बंग समुदाय अपने घरों को आम के पत्तों, अल्पना व कलश पर कच्चा नारियल रखकर सजायेंगे. घरों में पूरी, पांच तरह के भाजा, खीर, रसगुल्ला, चटनी, मिष्टी दोई, मछली जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाये जायेंगे. इसी दिन से बंग समुदाय के लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर अपने प्रतिष्ठानों में नये खाता-बही की शुरुआत करेंगे. मौके पर तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे.

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Published by: Manoj kumar

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