जन्माष्टमी पर सरकारी अस्पतालों में गूंजी किलकारी, एसएनएमएमसीएच में दो और सदर में एक बच्चे का जन्म

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर धनबाद के सरकारी अस्पतालों में खुशियां गूंज उठीं. आधी रात के बाद जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया, वहीं अस्पतालों में तीन नन्हे मेहमानों ने दुनिया में कदम रखा. एसएनएमएमसीएच में दो और सदर अस्पताल में एक बच्चे के जन्म से परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई.

जन्माष्टमी के मौके पर शुक्रवार की आधी रात के बाद धनबाद के सरकारी अस्पतालों में बच्चों की किलकारी गूंजी. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बीच शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) में दो और सदर अस्पताल में एक बच्चे का जन्म हुआ. नवजातों के आगमन से अस्पतालों के प्रसव कक्ष में मौजूद परिजनों के बीच खुशी का माहौल रहा. परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को बधाई दी और बच्चों के जन्म को पर्व के साथ जुड़ी खुशी के रूप में मनाया.

एसएनएमएमसीएच में दो नवजातों का जन्म

एसएनएमएमसीएच में जन्माष्टमी की आधी रात के बाद दो प्रसव हुए. राजगंज निवासी स्वाती देवी ने पुत्र को जन्म दिया, जबकि गिरिडीह निवासी रेशमा ने बेटी को जन्म दिया. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार दोनों प्रसूताओं और नवजातों की स्थिति सामान्य है. बच्चों के जन्म की सूचना मिलते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गयी.

अस्पताल के प्रसव कक्ष में मौजूद परिवार के सदस्यों ने नवजातों को देखने के बाद खुशी जतायी. जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों के जन्म को लेकर परिजनों के बीच विशेष उत्साह देखा गया.

सदर अस्पताल में भी जन्माष्टमी के बाद आयी खुशखबरी

इधर, सदर अस्पताल में भी शुक्रवार की आधी रात के बाद एक बच्चे का जन्म हुआ. हीरापुर निवासी महिला ने नवजात को जन्म दिया. बच्चे के जन्म की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्यों में खुशी छा गयी. जन्माष्टमी के पर्व के बीच परिवार में नये सदस्य के आने से परिजनों ने इसे खास अवसर बताया.

अस्पताल में मौजूद परिजनों ने नवजात के स्वस्थ होने पर खुशी जतायी. आधी रात के बाद हुए प्रसव के कारण परिवार के लिए जन्माष्टमी का पर्व और भी यादगार बन गया.

निजी अस्पतालों में भी कई प्रसव

जन्माष्टमी के अवसर पर धनबाद शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में भी कई प्रसव हुए. नवजातों के आगमन से इन परिवारों की पर्व की खुशियां भी दोगुनी हो गयीं. परिजनों ने बच्चों के जन्म को अपने लिए यादगार अवसर बताया.

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनायी जाती है. ऐसे में पर्व की आधी रात के बाद बच्चों के जन्म को लेकर परिजनों में स्वाभाविक रूप से उत्साह देखने को मिला. सरकारी अस्पतालों में जन्मे तीन नवजातों के परिवारों के लिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व नये सदस्य के स्वागत की खुशी के साथ खास बन गया.

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By Vicky Prasad

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