धनबाद में इस बार त्योहारों की मिठास जेब पर थोड़ी भारी पड़ने वाली है. चीनी के दाम में अचानक आई तेजी का असर अब मिठाई की दुकानों तक पहुंच गया है. शहर के बाजार में चीनी 65 से 66 रुपये किलो के आसपास बिक रही है, जबकि अन्य शहरों में चीनी का खुदरा भाव 70 रुपये किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है.
पिछले महीने ही चीनी करीब 44 रुपये किलो के आसपास थी. यानी थोड़े ही समय में कीमत में करीब 50 फीसदी तक का उछाल आया है. राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी साफ है. 18 अगस्त 2026 को खुदरा चीनी का औसत भाव 52.30 रुपये किलो था, जो एक साल पहले 46.34 रुपये था.
चीनी बढ़ी, लेकिन हर मिठाई पर बराबर असर नहीं
मिठाई की कीमत बढ़ने की वजह केवल चीनी नहीं है. जिन मिठाइयों में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, वहां इसका सीधा असर लागत पर पड़ता है. लड्डू, पेड़ा, गुलाब जामुन, मिल्क बेस्ड मिठाइयों और कई पारंपरिक मिठाइयों में चीनी महत्वपूर्ण कच्चा माल है. वहीं काजू कतली, काजू बर्फी, काजू-पिस्ता या मेवा वाली मिठाइयों में चीनी के साथ काजू, पिस्ता, बादाम, मावा और घी की कीमत भी बड़ी भूमिका निभाती है.
इसलिए चीनी के दाम में तेजी को मिठाई के भाव में 10-15 फीसदी बढ़ोतरी की अकेली वजह मानना पूरी तस्वीर नहीं होगी. कारोबारियों की लागत में चीनी के अलावा दूध, खोवा, ड्राई फ्रूट, घी, गैस, मजदूरी और पैकेजिंग भी शामिल हैं. हालांकि इस समय चीनी की तेजी त्योहार से ठीक पहले अतिरिक्त दबाव जरूर बना रही है.
रक्षाबंधन पर बढ़ेगी मिठाई की मांग, जेब पर असर
28 अगस्त को रक्षाबंधन है और इससे पहले मिठाई बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है. रक्षाबंधन पर राखी के साथ मिठाई देने की परंपरा के कारण बाजार में काजू कतली, बर्फी, लड्डू और मेवा वाली मिठाइयों की मांग बढ़ती है.
यही वजह है कि चीनी की कीमत में मौजूदा तेजी कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए अहम है. सामान्य दिनों में मिठाई की लागत का असर धीरे-धीरे कीमत में शामिल किया जा सकता है, लेकिन त्योहार के समय मांग बढ़ने पर लागत और बाजार भाव दोनों पर दबाव ज्यादा महसूस होता है. धनबाद के बाजार में फिलहाल मिठाइयों के भाव में करीब 10-15 फीसदी तक की तेजी की बात सामने आ रही है.
धनबाद की दुकानों में मिठाइयों के ये हैं मौजूदा दाम
धनबाद में चीनी की कीमत बढ़ने के बीच मिठाइयों के मौजूदा भाव पर नजर डालें तो अलग-अलग दुकानों में कीमतों में काफी अंतर दिखता है. मधुलिका धनबाद में काजू कतली 1280 रुपये किलो, मोतीचूर लड्डू 340 रुपये किलो, आटा लड्डू 460 रुपये किलो, अफगानी मेवा लड्डू 1650 रुपये किलो और काजू गुझिया 1650 रुपये किलो बिक रही है.
वहीं न्यू बॉम्बे स्वीट्स धनबाद में काजू बर्फी 1280 रुपये किलो, काजू पिस्ता 1580 रुपये किलो, काजू डायमंड 1480 रुपये किलो, काजू नीर 1600 रुपये किलो, मिक्स ड्राईफ्रूट 1600 रुपये किलो, सादा पेड़ा 600 रुपये किलो, मिल्क केक 660 रुपये किलो, गोंद लड्डू 800 रुपये किलो, मावा बर्फी 600 रुपये किलो, मेवा लड्डू 780 रुपये किलो और बनारसी लड्डू 680 रुपये किलो के भाव से बिक रहे हैं. इन कीमतों से साफ है कि चीनी के साथ काजू, मेवा, दूध और मावा जैसी सामग्री की लागत भी मिठाइयों के अंतिम दाम को प्रभावित कर रही है.
चीनी के दाम क्यों बढ़े, सरकार ने क्या कदम उठाए?
चीनी की मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण हैं. 2026-27 सीजन के लिए उत्पादन अनुमान शुरुआती करीब 343 लाख टन से घटकर करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है. खराब मौसम और गन्ने की पैदावार पर असर के साथ पुराने स्टॉक की स्थिति भी बाजार को प्रभावित कर रही है.
दूसरी ओर अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली और दूसरे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है. सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी को भी कीमतों में असामान्य तेजी का एक कारण बताया है.
एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर भी बहस है, लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल डायवर्जन नहीं है. सरकार के मुताबिक एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम हुई है.
कीमत नियंत्रित करने के लिए स्टॉक की सीमा तय
कीमत नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों के लिए 30 दिन और अधिकतम 4,000 क्विंटल स्टॉक की सीमा लागू की है. स्टॉक की जानकारी भी ऑनलाइन देने को कहा गया है. वहीं 1 सितंबर से महीने में 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं, जिनमें मिठाई कारोबारी भी शामिल हैं, उनको 15 दिनों की खपत से ज्यादा स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
