Jmm News : स्थापना दिवस पर विशेष
नारायण चंद्र मंडल, धनबाद
चार फरवरी को झारखंड मुक्ति मोर्चा अपना 54वां स्थापना दिवस धनबाद के ऐतिहासिक गोल्फ ग्राउंड में मना रहा है. पार्टी के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुआई में पार्टी अपना पहला स्थापना दिवस मना रही है. गत वर्ष 13-14 अप्रैल में रांची में हुए पार्टी के महाधिवेशन में हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया. स्वास्थ्य को देखते हुए अधिवेशन में गुरुजी को मुख्य संरक्षक बनाया गया था.
बढ़ता गया पार्टी का सामाजिक दायरा :
झारखंड अलग राज्य दिलाने वाला झामुमो अभी शीर्ष पर है, पर इस स्थिति तक पहुंचने में पार्टी को आंतरिक उपनिवेशवादी शोषण के खिलाफ कई संघर्ष करने पड़े. उसमें सैकड़ों लोगों को शहादतें भी देनी पड़ी. अलग राज्य के अलावा गांवों में वंचित जमात को हक दिलाने का संघर्ष तीव्र रहने के कारण सत्ता-शासन के अलावा प्रतिक्रियावादी ताकतों का शिकार झामुमो होता रहा, पर अभी हालात कुछ अलग है. पहले की तरह झामुमो को अब लोग केवल कुड़मी-मांझी का दल नहीं मानते. हेमंत सोरेन की दूरदर्शी राजनीति के कारण ग्रामीण क्षेत्र की हर जमात के लोग न केवल झामुमो से जुड़े, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी ने अलग पहचान बनायी. उसके कारण दिन-ब-दिन संगठन में विस्तार हो रहा है, जिसका परिणाम 2024 के दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. पार्टी ने अब तक के सबसे अधिक न केवल 34 सीटें जीतीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों को भी जिताया और इंडिया गठबंधन के नाम पर 56 सीटें आयीं.
देश के सबसे मजबूत आदिवासी नेता बन कर उभरे हेमंत सोरेनभले ही हेमंत सोरेन को राजनीति विरासत में मिली, पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने संघर्ष के बल पर जिस चांद को छुआ था, उसकी चांदनी को बरकरार रखने में उनके पुत्र हेमंत सोरेन कामयाब हुए हैं. हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो ने गत चुनाव में जो प्रदर्शन किया, उससे उनकी अपनी पहचान बनी. झारखंड की 28 जनजातीय आरक्षित सीटों में से 27 पर झामुमो ने जीत दर्ज कर संदेश दिया कि आदिवासी अस्मिता व संस्कृति का हितैषी केवल झामुमो ही है. यही नहीं, संताल परगना की कुल 18 सीटों में 17 सीटों पर गठबंधन दलों का परचम लहरा. उनमें झामुमो को अकेले 11 सीटें मिलीं. कोल्हान क्षेत्र में भी पार्टी ने अपना जलवा बरकरार रखा. हालांकि 2019 के चुनाव के मुकाबले गठबंधन दलों को तीन सीटों का खमियाजा भुगतना पड़ा. यही नहीं, दक्षिणी और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में भी पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया. झामुमो 2024 के चुनाव में 23.44 प्रतिशत मत लेकर राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभरा. उसका स्ट्राइक रेट 79 फीसदी रहा.दिल बड़ा कर गठबंधन दलों को दी इज्जत, तो कई जगह लहरा परचमइतनी कम सीट वाले राज्य में भी हेमंत सोरेन ने चुनाव के दौरान गठबंधन दलों को काफी सम्मान दिया. इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस, राजद के साथ सीपीआइ (एम-एल) को पहली बार गठबंधन दल में शामिल किया. इसका कारण रहा कि भाजपा का गढ़ बन चुके कोयलांचल क्षेत्र (धनबाद-बोकारो) में गठबंधन दलों को सफलता मिली. बोकारो जैसे शहरी क्षेत्र में जहां कांग्रेस ने बाजी मारी, वहीं चंदनकियारी में दशकों के बाद झामुमो ने सीट विपक्ष से झटक ली. उसी तरह निरसा में भाकपा माले ने जीत दर्ज की और सिंदरी में 24 साल बाद फिर से लाल झंडा फहरा. पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिला के भवनाथपुर में पार्टी ने जीत दर्ज कर यह संकेत दिया कि झामुमो अब केवल संथाल व कोल्हान का दल नहीं रह गया.
आदिवासियों के बीच सिंबोलिक पहचान बना चुका है झामुमो
झामुमो का चुनाव चिह्न तीर-धनुष है. आदिवासी समाज में यह चिह्न उनके संस्कृति से जुड़ा समझता है. इसलिए चुनाव के समय यह समाज तीर-धनुष देख कर मतदान करता है, उम्मीदवार कौन है, उनके लिए वह मायने नहीं रखता. यही कारण है कि संताल परगना में जिस नेता ने झामुमो छोड़ा, उनका या तो राजनीतिक अस्तित्व नष्ट हो गया या फिर घूम-फिर कर झामुमो में ही शामिल हुआ. पिछले 54 सालों से यह पहचान बनाये रखने में झामुमो ने जो सफलता पायी है, हिंदी पट्टी के किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए यह संभव नहीं हो पाया है.मजबूत सहयोगी के रूप में उभरीं हैं कल्पना सोरेन
जमीन के एक मामले में सीएम रहते हेमंत सोरेन को जेल जाने के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन एक मजूबत नेता के रूप में उभर कर सामने आयीं. गिरिडीह के गांडेय से रिकॉर्ड मतों से न केवल उन्होंने जीत दर्ज की, बल्कि गत लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सुपर स्टार प्रचारक के रूप में अपनी छाप छोड़ी. उन्हें सुनने के लिए जनसैलाब उमड़ा. हिंदी-अंग्रेजी समेत क्षेत्रीय भाषाओंं में जिस तरह बोलकर लोगों को झामुमो और इंडिया ब्लॉक की ओर मोहा, वह हाल के दिनों में पूरे भारत वर्ष में किसी सीएम की पत्नी में नहीं दिखता. भले ही वह अभी झामुमो केंद्रीय कार्यकारिणी की सदस्य मात्र है, पर झामुमो में नंबर दो पर रह चुकी है. विपक्षी दलों की नीतियों की आलोचना भी वह एक संस्कार युक्त महिला के रूप में करतीं, जिसके कारण युवा व प्रबुद्ध लोगों की वह पसंद बनती जा रही हैं. झामुमो में कल्पना के रूप में एक तेज तर्रार नेता के उदय के बाद झामुमो को नहीं चाहने वाले लोगों के घरों की महिलाओं में भी कल्पना सोरेन का क्रेज बना. सरकार बनने के बाद विदेश दौरा हो या फिर सदन के भीतर की गतिविधि, कल्पना ने आम लोगों की कल्पना से अधिक अच्छा प्रदर्शन किया.हेमंत की सादगी लोगों को भायी
गुरुजी के चार अगस्त 2024 के निधन के बाद उनके दशकर्म को लेकर आदिवासी परंपरा के अनुसार जिस तरह सीएम हेमंत सोरेन ने सादगी दिखायी, उसे लोगों ने खूब पसंद किया. पूरे कार्यक्रम तक अपने गांव नेमरा में कुटुंब संबंधियों के साथ रहना, संथाली परंपरा के अनुसार कर्मकांड करना और अतिथियों की आवभगत जिस तरह से किया, उसे उनके धुर विरोधियों ने भी प्रशंसा की.
