जिले में रैयती और सरकारी जमीन पर ओबी डंपिंग के मामले में विधानसभा की विशेष समिति ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है. गुरुवार को हुई समिति की बैठक में धनबाद के सिटी एसपी ने बताया कि बलियापुर अंचल के सीओ की प्राथमिकी और उस पर हुए अनुसंधान के आधार पर मेसर्स देवप्रभा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक व निदेशक कुंभनाथ सिंह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं.
पुलिस की रिपोर्ट सामने आने के बाद समिति ने धनबाद जिला प्रशासन को रैयतों की जमीन से अतिक्रमण हटाने और प्रभावित जमीन का निपटारा करने की दिशा में कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया. समिति की जांच में पहले भी बलियापुर अंचल में करीब 50 रैयतों की जमीन पर ओबी डंप किये जाने की जानकारी सामने आ चुकी है.
बैठक में समिति के संयोजक सह टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, धनबाद विधायक राज सिन्हा, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया समेत संबंधित विभागों के विशेष सचिव, धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, अपर समाहर्ता प्रदीप कुमार शुक्ला सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे.
सुरंगा से जीनागोड़ा तक जांच में सामने आयी थीं कई शिकायतें
देवप्रभा के खिलाफ मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा. विधानसभा की विशेष समिति ने सितंबर 2025 में धनबाद के सुरुंगा, पहाड़ीगोड़ा, जीनागोड़ा, नुनुडीह, महुलबनी, भौंरा, गौखूंटी, रसियाबाद और केशलपुर समेत कई इलाकों का स्थल निरीक्षण किया था.
ग्रामीणों ने समिति के सामने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन पर मुआवजा और नियोजन दिये बिना ओबी डंप किया गया. सुरुंगा में ग्रामीणों ने सड़क, तालाब और विद्यालय तक ओबी से ढंक जाने की शिकायत की थी. समिति ने स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद सरकारी, वन और रैयती जमीन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को गंभीर माना था.
रिपोर्ट में मुआवजा, नियोजन और जमीन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
समिति की पूर्व जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि स्थानीय रैयतों से जमीन लिये जाने के बावजूद मुआवजा और नियोजन से जुड़े मामलों में गंभीर लापरवाही सामने आयी है. कुछ स्थानों पर बिना अधिग्रहण के रैयती, सरकारी और वन भूमि के इस्तेमाल के साक्ष्य मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गयी.
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समिति ने जमीन की मापी कराने, कंपनी के कागजात में दर्ज खाता संख्या, रकबा और मानचित्र का वास्तविक स्थिति से मिलान कराने तथा अतिक्रमण मिलने पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी. अक्टूबर 2025 में समिति ने जांच पूरी होने तक जीनागोड़ा एनटीएसटी परियोजना में देवप्रभा के उत्खनन और ओबी डंपिंग पर अस्थायी रोक लगाने तथा अमीन के माध्यम से जमीन की मापी कराने का निर्देश भी दिया था.
अब टाटा की जमीन से लेकर बीसीसीएल की जमीन का भी होगा हिसाब
बैठक में समिति ने सिजुआ-मेलाटांड़ क्षेत्र में टाटा द्वारा इस्तेमाल की जा रही सरकारी जमीन की पूरी जानकारी मांगी है. साथ ही रैयतों से अधिग्रहित जमीन के एवज में सरकार को कितना राजस्व मिला, इसका भी ब्योरा तलब किया गया है. बीसीसीएल को जमीन की उपग्रह आधारित मापी के लिए आइआइटी धनबाद से जल्द समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया.
समिति ने जमीन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाने, सीएनटी सहित अन्य मामलों का तेजी से निपटारा करने तथा अधिग्रहित जमीन के एवज में रैयतों को भुगतान कराने के लिए भी शिविर लगाने को कहा है.
बीसीसीएल की बड़ी मात्रा में जमीन का अब तक दाखिल-खारिज नहीं होने का मुद्दा भी समिति की बैठकों में उठ चुका है. पूर्व की रिपोर्टों के अनुसार बीसीसीएल की करीब 15 से 20 हजार एकड़ जमीन के म्यूटेशन का मामला लंबित बताया गया था.
दामोदर नदी से भी हटेगा अतिक्रमण, छह महीने का दिया समय
बैठक में दामोदर नदी से अतिक्रमण हटाने के मामले में बीसीसीएल को छह महीने का समय दिया गया है. समिति ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाए. इसके अलावा खनन क्षेत्रों में सरकारी, वन और रैयती जमीन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की अलग-अलग जांच और रिकॉर्ड का मिलान कराने पर जोर दिया गया है.
