धनबाद के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बूथों के भौतिक निरीक्षण के दौरान मतदाताओं के भरे गये इन्यूमरेशन फॉर्म और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कई तरह की विसंगतियां सामने आयी हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ईआरओ और एईआरओ को उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
सीईओ ने निर्देश दिया है कि एक माता-पिता और उनके बेटा-बेटी से जुड़े मामलों की सुनवाई यथासंभव एक साथ की जाये. इससे परिवार के सदस्यों की आयु, पारिवारिक संबंध, नागरिकता संबंधी विवरण और उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये दस्तावेजों का आपस में मिलान किया जा सकेगा. किसी एक सदस्य की आयु या दस्तावेज में विसंगति मिलने पर जरूरत के अनुसार परिवार के अन्य सदस्यों के विवरण और दस्तावेजों की भी जांच की जायेगी.
जन्मतिथि में अंतर और भाई-बहन की उम्र को लेकर भी मामले
निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आये, जिनमें वैध दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि और इन्यूमरेशन फॉर्म में दर्ज जन्मतिथि अलग-अलग पायी गयी. इसके अलावा कुछ बूथों पर भाई-बहन की जन्मतिथि में नौ माह से भी कम का अंतर दर्ज होने के मामले भी सामने आये.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने ऐसे मामलों में उपलब्ध प्रामाणिक दस्तावेजों का आपस में मिलान करने के बाद ही सुनवाई को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को उपलब्ध वैध और प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर ही सत्यापित किया जाये.
उम्र में बदलाव की जानकारी भी सामने आयी
निरीक्षण के दौरान ऐसे मामले भी सामने आये, जिनमें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के उद्देश्य से उम्र को बढ़ाने या घटाने की बात सामने आयी. ऐसे मामलों को लेकर सीईओ ने मतदाताओं से अपील की कि सुनवाई के दौरान ईआरओ या एईआरओ के समक्ष सही तथ्य रखें और उनके पास उपलब्ध सभी प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करें.
उन्होंने कहा कि सही जानकारी और प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने से मतदाता सूची में दर्ज विसंगतियों का नियमानुसार समाधान किया जा सकेगा. मतदाताओं को किसी भी तरह की गलत जानकारी देने से बचने की सलाह दी गयी है.
गलत पारिवारिक मैपिंग की भी होगी जांच
भौतिक निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आये, जिनमें मतदाताओं की मैपिंग वास्तविक पारिवारिक दस्तावेजों के अनुरूप न होकर अन्य रिश्तेदारों के साथ की गयी थी. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने ऐसे मामलों में वास्तविक पारिवारिक संबंध और उपलब्ध प्रमाणों की जांच कर सही पारिवारिक मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
संबंधित मतदाता पर लागू वैध और प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर ही आवश्यक प्रविष्टि करने और उन्हीं दस्तावेजों को अपलोड करने को कहा गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दस्तावेजों और पारिवारिक संबंधों का मिलान करने के बाद ही किसी मामले को अंतिम रूप दिया जाये.
विदेशी नागरिकों के नाम पर भी स्पष्ट निर्देश
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने विदेशी नागरिकों के मतदाता सूची में नाम शामिल किये जाने को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि कोई विदेशी नागरिक भारत सरकार के सक्षम प्राधिकारी से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित अन्य वैधानिक अर्हताएं पूरी करने के बाद ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है.
भारतीय नागरिकता प्राप्त किये बिना गलत घोषणा या गलत जानकारी के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. यदि किसी विदेशी नागरिक का नाम किसी भारतीय परिवार के विवरण, दस्तावेज या पारिवारिक संबंध का गलत इस्तेमाल कर मतदाता सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा हो या उसका नाम गलत तरीके से दर्ज हो गया हो, तो फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज की जा सकती है.
ऐसे मामलों में ईआरओ स्तर पर संबंधित परिवार के दस्तावेजों, पारिवारिक संबंधों और मतदाता के पात्रता संबंधी विवरण की जरूरत के अनुसार जांच की जायेगी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जांच के दौरान उपलब्ध प्रमाणिक दस्तावेजों और वास्तविक तथ्यों का मिलान करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें.
