धनबाद के रंजय सिंह हत्याकांड में अदालत का फैसला, 9 साल बाद आरोपी बरी, 23 गवाह भी साबित नहीं कर पाए जुर्म

धनबाद का बहुचर्चित रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड आखिरकार 9 साल बाद एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले के दोनों मुख्य आरोपियों को बरी कर दिया है. अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा, जिससे आरोपियों को बड़ी राहत मिली है.

धनबाद : धनबाद के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में शनिवार को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने करीब नौ साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद मामले के आरोपी नंदकुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को बरी कर दिया है. अदालत ने दोनों आरोपियों को 'संदेह का लाभ' देते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट में अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) इन दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से साबित करने में नाकाम रहा, जिसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला.


आरोपी हर्ष सिंह अपने परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए, Pic Credit- Prabhat Khabar

23 गवाहों की गवाही भी नहीं कर पाई जुर्म साबित

इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई पिछले करीब नौ सालों तक अदालत में चली. इस दौरान सरकारी पक्ष की ओर से आरोप साबित करने के लिए कुल 23 गवाहों को अदालत में पेश किया गया. इन सभी गवाहों से बचाव पक्ष के वकीलों ने सवाल-जवाब (क्रॉस एग्जामिनेशन) किये. सभी सबूतों और लंबी बहस को देखने के बाद अदालत ने 19 सितंबर 2026 को अपना अहम फैसला सुना दिया. इससे पहले अदालत ने पांच सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी, लेकिन सरकारी वकील सत्येंद्र कुमार राय ने कानूनी बिंदुओं पर बहस के लिए कुछ और समय मांगा था, जिसके कारण फैसला टाल दिया गया था.


आरोपी हर्ष सिंह अपने परिवार के साथ, साथ में ही कांग्रेस से पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह

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2017 में बीच सड़क पर हुई थी रंजय की हत्या

आपको बता दें कि 29 जनवरी 2017 की शाम करीब साढ़े पांच बजे धनबाद के बिग बाजार के सामने चाणक्य नगर मोड़ पर रंजय सिंह की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. रंजय सिंह को धनबाद के पूर्व मेयर संजीव सिंह का बेहद करीबी माना जाता था. सरेआम बीच सड़क पर हुई इस हत्या के बाद पूरे धनबाद में हड़कंप मच गया था. पुलिस ने अपनी लंबी जांच के बाद इस हत्याकांड में नंदकुमार सिंह और हर्ष सिंह को मुख्य आरोपी बनाया था. लेकिन अब सालों चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत से सबूतों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया गया है.

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आरोपी हर्ष सिंह अपने पूरे परिवार के साथ अदालत के फैसले के बाद

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लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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