धनबाद. कभी धूल और धुएं के कारण प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे धनबाद की हवा में सुधार के संकेत मिले हैं. नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किये गये कार्यों के बाद पीएम-10 के वार्षिक औसत स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है. नगर निगम के अनुसार, पिछले छह वर्षों में वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों पर 69.09 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.
315 से घटकर 135 माइक्रोग्राम हुआ पीएम-10
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 में धनबाद में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 315 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था. अब यह घटकर 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया है. इस तरह 2017-18 के स्तर की तुलना में पीएम-10 में करीब 57 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है.
नगर निगम का कहना है कि आने वाले वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल हवा की गुणवत्ता की निगरानी तक सीमित रहने के बजाय प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को कम करने पर अधिक जोर दिया जायेगा. इसके तहत प्रमुख और व्यस्त सड़कों पर एंड-टू-एंड पेवमेंट, सड़क किनारे के कच्चे हिस्सों को पक्का करने और नियमित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है.
55 वार्डों में तैयार होगा क्लीन एयर एक्शन प्लान
नगर निगम अब धनबाद के सभी 55 वार्डों के लिए वार्ड-स्तरीय क्लीन एयर एक्शन प्लान को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा. इसके तहत प्रत्येक वार्ड में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्थानीय स्रोतों की पहचान की जायेगी. स्रोत के अनुसार उपाय तय कर संबंधित क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के प्रयास किये जायेंगे.
नगर निगम के अनुसार, बाजार, स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आम नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ा जायेगा. जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को प्रदूषण कम करने में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जायेगी.
कई विभागों को अभियान से जोड़ने की तैयारी
नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने कहा कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में धनबाद को बेहतर रैंकिंग मिली है. उनके अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 तक एनसीएपी और 15वें वित्त आयोग के तहत किये गये कार्य सामूहिक प्रयास का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि अब इन प्रयासों को और गति देकर धनबाद को बेहतर, हरित और स्वच्छ हवा वाला शहर बनाने का लक्ष्य है.
उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण की मुहिम में नगर निगम के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी), जिला प्रशासन, बीसीसीएल समेत अन्य संबंधित विभागों को भी जोड़ा जायेगा.
प्रदूषण के स्रोतों पर होगा अगला फोकस
धनबाद में पीएम-10 के स्तर में कमी के बाद अब नगर निगम की रणनीति प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने पर केंद्रित करने की तैयारी है. सड़क की धूल, कच्चे हिस्सों और अन्य स्थानीय स्रोतों की पहचान कर वार्डवार उपाय किये जाने से प्रदूषण नियंत्रण की कोशिशों को स्थानीय स्तर पर लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. नगर निगम के अनुसार, स्वच्छ हवा के लिए निगरानी, सड़क सुधार, यांत्रिक सफाई और जनभागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है.
