जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त फलदार पौधे उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गयी है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में उद्यान विकास योजना के तहत 25 हजार फलदार पौधों की कलम और गुटी तैयार की जायेगी. इसके लिए जिला उद्यान कार्यालय ने योग्य संस्थाओं, एजेंसियों और नर्सरियों से दर कोटेशन मांगा है. तैयार पौधों को करीब एक वर्ष तक नर्सरी में विकसित और सुरक्षित रखा जायेगा. इसके बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले पौधे किसानों को न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराये जायेंगे.
तोपचांची और गोविंदपुर में तैयार होंगे पौधे
योजना के तहत प्रखंड उद्यान नर्सरी, तोपचांची और गोविंदपुर में फलदार पौध तैयार किये जायेंगे. इनमें मुख्य रूप से आम, अमरूद और नींबू के पौधे शामिल होंगे. कलम और गुटी से तैयार पौधों की नर्सरी में नियमित देखभाल की जायेगी. इससे किसानों को जिले में ही बेहतर गुणवत्ता वाले फलदार पौधे उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित होगी.
25 हजार पौधों पर करीब 15 लाख रुपये खर्च
पौधों की तैयारी और एक वर्ष तक उनके रखरखाव के लिए प्रति पौधा 60 रुपये की दर निर्धारित की गयी है. 25 हजार पौधों के हिसाब से कुल अनुमानित खर्च करीब 15 लाख रुपये होगा. इस राशि में पौध तैयार करने से लेकर एक वर्ष तक नर्सरी में उसके रखरखाव से जुड़ी प्रक्रिया शामिल होगी. पौधों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना जरूरी होगा.
ग्राफ्टिंग और गुटी से तैयार होंगे पौधे
फलदार पौधों को ग्राफ्टिंग और गुटी पद्धति से तैयार किया जायेगा. इसके लिए एक वर्ष पुराने बीजू पौधों का इस्तेमाल किया जाना है. पौधों में स्वस्थ और विकसित जड़ होना जरूरी होगा. रोगमुक्त पौधों को ही आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जायेगा. निर्धारित आकार के काले पॉलीथिन बैग में पौधों को विकसित किया जायेगा, ताकि जड़ और पौधे का समुचित विकास हो सके.
एक साल बाद किसानों को मिलेंगे पौधे
तैयार पौधों का तत्काल वितरण नहीं किया जायेगा. उन्हें करीब एक वर्ष तक नर्सरी में रखकर विकसित किया जायेगा. गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले पौधों को बाद में किसानों के बीच न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराया जायेगा. इससे किसानों को फलदार बाग लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर पौध सामग्री मिलने की सुविधा होगी.
बागवानी को मिलेगा बढ़ावा
जिले में 25 हजार गुणवत्तायुक्त फलदार पौध तैयार होने से बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. आम, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधों की उपलब्धता बढ़ने से किसान अपनी जमीन पर बागवानी का क्षेत्र बढ़ा सकेंगे. बेहतर गुणवत्ता वाले पौध मिलने से उत्पादन की संभावना भी बढ़ सकती है और फल उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है.
